Aatamaabhivyakti

extremely CRUDE ; completely PURE

243 Posts

3092 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 9545 postid : 1326674

आह शून्य !!

Posted On: 24 Apr, 2017 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

1) सपने

बहुत स्पष्ट होते हैं
साफ़ पानी की तरह
सपने निर्मल आँखों के
पलता है वक़्त उन सपनों में
शान्ति और प्रतीक्षा से
नहीं बनते अजीबोगरीब नक़्शे
जैसे सर्दियों में दर्पण पर
छोड़ी गई साँसों से उभरते हैं
नहीं होती कोई उथल पुथल
होती है गहरी नींद
शांत …बिलकुल शांत
सपने तैरते रहते हैं बंद पलकों में
मानो शांत गहरी झील में तैरते हंस .
बहुत सुन्दर होते हैं
निश्छल आँखों के सपने .

2) आह शून्य !!!

आह शून्य !!!
बाह्य रूप में हो
सम्पूर्ण…पूर्णतः गोल
अंदरूनी रूप में
तुम्हारा मूल्य कुछ भी नहीं
कैसे सहते हो
अपने ही विरोधाभास की पीड़ा ??



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran