Aatamaabhivyakti

extremely CRUDE ; completely PURE

245 Posts

3097 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 9545 postid : 1325284

...वे गुलमोहर से झरते गए

Posted On: 17 Apr, 2017 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

1)
…वे गुलमोहर से झरते गए

पत्थर बंदूक बारूद और दरमियां बढते गए
जमीं के नक्शे सुर्ख हो इतिहास रंगते गए ।
जिंदगी और मौत बीच आशियां उजड़ते गए
कुदरत सिसक रही वे गुलमोहर से झरते गए ।

2)

रंजिश की बर्फ

अब तक पिघली नहीें
रंजिश की बर्फ
क्यों हुआ इतना सर्द
कश्मीर का दर्द ।

रफ्ता रफ्ता चुका रहे
बहते लहू से कर्ज
हौले हौले पड़ते पन्ने
इतिहास के जर्द ।

कौन से पन्नों से फिर
जमीं जन्नत की सुर्ख
सरहद पार से आते
कश्मीर मेे दहशत गर्द ।

रूठो न मुझसे बाबू जी
करती थी कली अर्ज
गमगीन तराने से
कुदरत निभा रही फर्ज ।



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

11 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Alka के द्वारा
April 27, 2017

क्यों हुआ इतना सर्द, कश्मीर का दर्द यमुना जी सच मन को छू गई आपकी रचना | सार्थक प्रस्तुति |

Shobha के द्वारा
April 22, 2017

प्रिय यमुना जी अति सुंदर भाव पूर्ण पंक्तिया दिल को छू गयीं कश्मीर का दर्द । रफ्ता रफ्ता चुका रहे बहते लहू से कर्ज हौले हौले पड़ते पन्ने

    yamunapathak के द्वारा
    April 24, 2017

    आदरणीय शोभा जी सादर नमस्कार कश्मीर के जवानों का दुःख अब असह्य हो गया है.आपकी प्रेरणा के लिए बहुत बहुत आभार .

amarsin के द्वारा
April 20, 2017

एक अच्छी कविता…

    yamunapathak के द्वारा
    April 24, 2017

    जी आपका बहुत बहुत आभार

sadguruji के द्वारा
April 20, 2017

रूठो न मुझसे बाबू जी करती थी कली अर्ज गमगीन तराने से कुदरत निभा रही फर्ज । आदरणीया यमुना पाठक जी ! सादर अभिनन्दन ! कश्मीर की कली तो अब गाना और मुस्कुराना दोनों भूल चुकी है ! दहशत और पत्थरबाजी के मौजूदा दौर में अब वो घरों में कैद हो चुकी है ! आज लोग कश्मीर जाने से घबरा रहे हैं ! बहुत मार्मिक भाव और लयबद्ध शब्दों में कश्मीर की स्थिति आपने बयान की है ! अच्छी प्रस्तुति हेतु सादर आभार !

    yamunapathak के द्वारा
    April 24, 2017

    आदरणीय सद्गुरू जी सादर नमस्कार आपने सही कहा .देश के नागरिक कश्मीर के इस दर्द पर क्या करें ?? साभार

jlsingh के द्वारा
April 20, 2017

बेहतरीन समसामयिक आदरणीया यमुना जी

    yamunapathak के द्वारा
    April 24, 2017

    आदरणीय जवाहर जी आपका अतिशय आभार

sinsera के द्वारा
April 19, 2017

बहुत खूबसूरत कविता यमुना जी. काश यह संवेदना उन लोगों के ह्रदय में भी जगे जो स्वर्ग सी पृथ्वी को श्मशान बनाने पर तुले हैं.

    yamunapathak के द्वारा
    April 24, 2017

    प्रिय सरिता जी नमस्कार यह कविता बहुत दुःख के साथ ही लिखी हूँ .क्या हो गया है कश्मीर के कुछ युवाओं को स्कूल कॉलेज के बच्चे और पथरबाज़ी .आप ने इसे पढ़ा बहुत बहुत धन्यवाद . साभार


topic of the week



latest from jagran