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वे मेरे पड़ोसी

Posted On: 5 Jan, 2016 Others,कविता में

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1)

वे
मेरे
पड़ोसी
उन्मादित
करते संधि
उठाते बन्दूक
फना होते विश्वास
.

2)
जो

कभी
निभे ना
दोस्ती तब
निभा जी भर
रिश्ता दुश्मनी का
याद कुछ तो रहे .

3)

मैं
कभी
गिरूँ तो
थाम लेना
क्योंकि तुम ही
हो मेरा विश्वास
रहे जन्मों का साथ .

4)

मैं
एक
तितली
मंडराती
फूल फूल पे
पर सहेजती
सिर्फ पराग कण .

5)

ये
कैसा
मंज़र
फैला लहू
क्या पृथ्वी बनी
है मंगल ग्रह
जीव से महरूम .

6)


एक
कहानी
ऐसी कहूँ
जिसे जमाना
भुलाये कभी ना
और ज़िंदा रहूँ मैं .

7)

मैं
नदी
भर लो
अंजुली में
या मटके में
आकार ही लूँगी
मटका ना बनूँगी .

8)

जो
मिले
थोड़ी सी
मोहलत
चलाती रहूँ
लेखनी जी भर
रच जाए संसार .

9)

तू
मेरा
नसीब
ना हो पर
नसीब को भी
बदलते देखा
जब मुझे वो मिला.

10)

तू
नहीं
किसी के
पेशानी पे
शमशीर सा
जिसे उंगली से
पोंछ गिराया जाए .

11)

हैं
ऐसे
मिज़ाज़
मौसम के
बदलते हैं
कुदरत के ही
नियमानुसार ये .



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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bhola nath Pal के द्वारा
January 17, 2016

कोई लिखना आप से सीखे !अच्छी भाव भरी कविता …………..

jlsingh के द्वारा
January 8, 2016

ये/ नहीं/ आसान भाव शिल्प/ मस्तूल संग/ बंधा फैला हुआ/ संग बड़ा आधार / बस एक कोशिश में /- जवाहर

    yamunapathak के द्वारा
    January 8, 2016

    वाह जवाहर जी यह बहुत सुन्दर है …मैंने भी निशा जी से सीखा था …हाइकू भी सिखाया उन्होंने पर मैं लिख ही नहीं पा रही फिर भी कोशिश जारी है…जिस दिन सफल हुई खूब सारी हाइकू पोस्ट करूंगी .. साभार

deepak pande के द्वारा
January 8, 2016

bahut khoobsurti se apne vichaar prastut kiye aadarniya yamuna jee

    yamunapathak के द्वारा
    January 8, 2016

    दीपक जी आपका बहुत बहुत आभार

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
January 8, 2016

आदरणीय यमुना जी बहुत सुंदर तरीके से आपने कविता रूप मे अपने विचारों को व्यक्त किया है । रचनाकर्म मे विधा कोई भी हो लेकिन भावों व विचारों की अभिव्यक्ति जरूरी है । …………सादर

    yamunapathak के द्वारा
    January 8, 2016

    बिष्ट जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद

    yamunapathak के द्वारा
    January 8, 2016

    बहुत बहुत आभार कुमारेन्द्र जी

Shobha के द्वारा
January 7, 2016

प्रिय यमुना जी आपके अपने स्टाईल में लिखी गी बहुत ही भाव प्रधान कविता परन्तु आपके लेख पढने की भी इच्छा है वह भी आपकी कविता के समान संपूर्ण होते हैं |

    yamunapathak के द्वारा
    January 8, 2016

    आदरणीय शोभा जी .यह शब्द पिरामिड मुझे आदरणीय निशा जी ने सिखाई है.आपको यह अच्छी लगी आपका बहुत बहुत आभार

Rinki Raut के द्वारा
January 6, 2016

यमुना जी बहुत सुन्दर कविता है

    yamunapathak के द्वारा
    January 8, 2016

    बहुत बहुत धन्यवाद रिंकी जी.आज आपका ब्लॉग अख़बार में भी पढ़ा .बहुत सुन्दर और सलीके से लिखती हो …मुझे पढ़ कर बहुत अच्छा लगता है.


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