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हिन्दी भाषा ..डेस्क से डिजिटल तक

Posted On: 15 Sep, 2015 Others,Junction Forum,Special Days में

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मेरे प्रिय ब्लॉगर साथियों

निकट भविष्य में जल्द से जल्द हिन्दी संयुक्त राष्ट्र संघ में आधिकारिक भाषा(ऑफिसियल ) के रूप में पहचान बनाये इस अभिलाषा के साथ यमुना का सभी भारतीयों और विश्व के सभी हिन्दी भाषा प्रेमियों को हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामना .

हिन्दी आज जन जन तक पहुँच रही है इसमें कोई दो राय नहीं .डिजिटल क्रान्ति ने हिन्दी को अहम स्थान देकर इसके आयाम को सिर्फ अपने वतन में ही नहीं बल्कि सुदूर देशों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है.हिन्दी भाषा कहती है….

रवानगी है मेरी…..
बच्चों की तोतली ज़बान से
गाँव कस्बों के अभिमान से
स्नेह की सरलाभिव्यक्ति में
भारतीयता भाव की शक्ति में

मान मेरा निज धरती पर बढ़ाओगे
सम्मान पर जमीन पे भी पाओगे
संतानों ने माँ का मान सदा बढ़ाया है
निज भाषा संग कौन कहाँ पराया है !!!!!!!!!!!!

आज मैं इस सम्मानीय अनुपम मंच के प्रति तहे दिल से आभार व्यक्त करती हूँ जिसने हम जैसे अदने से कई ब्लोग्गेर्स की लेखनी का माध्यम देकर अपने विचार और अपनी भाषा को हिन्दी प्रेमियों तक पहुँचाने का ज़रिया बनाने का स्वर्णिम अवसर दिया .हिन्दी भाषा को लेकर मैं खुश हूँ और बेहद संतुष्ट भी क्योंकि मैं हिन्दी भाषा की सुनहरी किरणों को दूर दूर तक उजाला फैलाती देख पा रही हूँ .गली से लेकर सत्ता के गलियारों तक ….देश से लेकर प्रदेश की सरहदों तक हिन्दी उड़ान भर रही है .

कथा कहानी कविता संस्मरण संग
प्रस्तुत है लेकर अपने विविध रंग
गली से सत्ता के गलियारों तक
देश से परदेश की सरहदों तक
डेस्क से डिजिटल तक आ रही है
परचम अपना खूब लहरा रही है
बन विश्व पहचान मुस्करा रही है
हिन्दी सच में विस्तार पा रही है .

समें हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री जी का भी अहम योगदान है जिन्होंने वैश्विक मंच पर हिन्दी का परचम लहर दिया .थोड़ी सी जो कसर बच रही है वह भी जल्द पूरी हो जाएगी जब हिन्दी भाषा संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक (ऑफिसियल) भाषा बन जाएगी …और वैश्विक पटल पर भारत को और भी सशक्तता से पहचान देकर मान बढ़ाएगी.
आज इस अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर पर देश विदेश में बसे भारतीयों से मेरा यही अनुरोध है वे चाहे कितने भी ऊंचे ओहदे पर पहुँच गए हों अपनी जमीन से जुड़े रहे हिन्दी भाषा उनकी आन बान शान की प्रतीक है.अपनी भाषा का मान उन्हें विदेशों में भी सम्मान दिलाएगा . प्राथमिक शिक्षा हो या उच्च शिक्षा …कभी राष्ट्रभाषा और मातृ भाषा से जुदा होना नहीं सीखाती है.

नियम गुरूत्वाकर्षण का..
………….
हर नेक बड़े दिल इंसान ने
इस अध्याय को है बखूबी पढ़ा
तभी तो …
जानते हैं वे सब
ऊंचाई पर पहुँच कर भी
जमीन से जुड़े रहना .

मारा मान हमारा सम्मान जमीन से अपनी जड़ों से जुड़ कर रहने में है .अधिकाधिक ज्ञानार्जन के लिए अन्य कई भाषाएँ सीखने में कोई हर्ज़ नहीं पर अभिव्यक्ति के लिए राष्ट्रभाषा का सम्मान ज़रूरी है.

आइये अपनी जड़ों से जुड़ें .

हमारी हिन्दी भाषा …संस्कृति की प्रत्याशा



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
September 22, 2015

संक्षिप्त, परन्तु बहुत सुन्दर और सार्थक लेख ! हार्दिक बधाई !

pkdubey के द्वारा
September 19, 2015

अवश्य ही मातृभाषा वही है ,जिसे शिशु अपने शैशवकाल में सर्वप्रथम बोलता है और वह भाषा वह सबसे शीघ्र और आसानी से सीखता होगा ,भले ही हम कितने ही एडवांस क्यों न हो जाएँ | आदरणीया ,मेरे नन्नू से यह मुझे अनुभव हुआ,पर वह इंग्लिश भी सीख रहे ,जैसे -वह कहते ,हिन्दी में बिल्ली ,इंग्लिश में कैट | एक बार मैंने एक माँ को देखा,जो अपनी सहेली को यह बता रही थी – मेरा बच्चा ३-४ साल का हो गया,पर बोलता नहीं ,वह इंग्लिश में बात कर रही थी ,बच्चा उदास बैठा था ,मैंने बच्चे की ओर मुस्कराते हुए देखा ,और वह भी मुझे देखकर मुस्कराया,मुझे ऐसे लगता है -बच्चे भी भगवान की तरह भाव के ही भूखे हैं ,सरल और सहज होकर मिलो,बोलना तो क्या ,वह साथ में चल देंगे | अतः मातृभाषा ही माँ -संतान के बीच प्रेम का पहला पाठ है | सादर आभार और नमन |


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