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ओह! दिस स्लॉपी क्रॉल....(ट्रेजेडी ऑफ़ डॉक्टर्स प्रिस्क्रिप्शन)

Posted On: 19 Aug, 2015 Junction Forum,lifestyle,Others में

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PicsArt_1439962439038एक पर्ची ,उस पर अंग्रेज़ी के अक्षरों में लिखे कुछ शब्द जिसे पढ़ पाना सागर मंथन के सदृश,पढ़ कर समझने में सफल तो अमृत पा लिया और दुर्भाग्यवश न पढ़ पाए तो ये शब्द विष बन जाएंगे …..
हाँ ,यही तो होती है “Tragedy of doctor’s prescription “

आज कंप्यूटर के तेजी से बढ़ते प्रचलन से अगले कुछ दशकों में कागज़-कलम संग्रहालय में रखी जाने वाले वस्तुओं की सूची में नाम दर्ज कराने की कतार में खड़े होने को तैयार हैं.तकनीक क्षेत्र में तीव्रता से बदलते परिवेश में विद्यालयों में प्रयुक्त शिक्षा के ये अहम् साधन कब ऐतिहासिक पृष्ठों की शोभा बन जाएं ,कुछ कहा नहीं जा सकता.

प्रिय पाठकों,आप सभी को हिन्दी की क्लास में सुलेख और इंग्लिश की क्लास में सुलेख के होम वर्क याद होंगे ,जो ना चाहते हुए भी
हमें प्रतिदिन एक-एक पेज लिखने ही होते थे.नौकरी प्राप्त करने के लिए भेजे जाने वाले दरखास्त (application ) भी कभी-कभी
स्वयं की handwriting में ही भेजने की शर्त होती थी.इसका उद्देश्य उम्मीदवार के व्यक्तित्व की पहचान करना होता था और लिखावट
विशेषज्ञ (handwriting analyst ) इस बात को बखूबी अंजाम भी देते थे.मुझे याद है मेरे छोटे भाई की लिखावट सुन्दर न होने की
वज़ह से वे मुझसे ही application लिखवाते थे.पर एक बार उनसे यही कहा गया,”यह लिखावट आपकी नहीं है”उन्होंने यह बात
स्वीकार की पर जानकारी के लिए पूछा “आप इतने विश्वास पूर्वक यह बात कैसे कह रहे हैं?”तब उन analyst ने कहा’” आप जिस
जॉब के लिए आये हैं उस क्षेत्र में कलात्मक लिखावट के प्रति रुझान बहुत कम देखने को मिलता है.ऐसी लिखावट के व्यक्ति शिक्षा,कला
या साहित्य से जुड़े लोग ही हो सकते हैं.”

शिक्षण व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए लिखावट की स्पष्टता एक अपेक्षणीय शर्त होती है.एक और महत्वपूर्ण व्यवसाय जो इस शर्त की
अनिवार्यता से जुडा होना चाहिए वह स्वास्थ्य के साथ-साथ जीवन-मृत्यु से सम्बंधित चिकित्सा का क्षेत्र है.पर आम तौर पर देखा जाता
है कि स्कूली शिक्षा में प्रतिदिन सुलेख का गृह कार्य करने वाले विद्यार्थियों में से वे कुछ लोग जो आगे उच्च शिक्षा के बाद डॉक्टर बनते
हैं वे जाने कितनी जल्दबाजी में होते हैं कि prescription में ऐसी handwriting लिखते हैं मानो कोई चींटी स्याही भरी दवात से
बाहर आकर कागज़ पर रेंग गई हो (sloppy crawls)और tragedy यह कि इस लिखावट को डॉक्टर भले ही समझ रहा हो पर जिसके
लिए लिखा जा रहा है उसे या फिर कैमिस्ट को समझ में आ जाए इसकी कोई निश्चितता (certainity)नहीं होती है.शायद इसलिए
एक लोक प्रचलित उपमा भी लोग देते हैं “his/her handwriting is as illegible as doctor’s prescription.”विशेष रूप
से गाँव ,कस्बों और छोटे शहरों के कुछ chemist drug prescription नहीं पढ़ पाते.

इसका कारण क्या है-असावधानी,जल्दबाजी या असंवेदनशीलता ? जाहिर सी बात इतने आदर्श पेशे से जुड़े लोग वाकई अपने मरीज के
प्रति पूर्णतः संवेदनशील होते हैं.उन्हें स्वस्थ देखने और उनकी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को सुन कर मृदु स्वभाव और मधुर वाणी का भी
परिचय देते हैं और उनके(मरीज) लिए कल्याणकारी (शिवम्)भी साबित होते हैं.जो मरीज को पूर्ण सत्यता से अपनी स्वास्थ्य संबंधी बात
कहने का विश्वास देता है. जब
सत्यम,शिवम् तक बात आ जाती है तो उसे सुन्दरम भी बनाने की कोशिश करना अत्यावश्यक है.पर्ची(prescription )में सुन्दर,स्पष्ट
अक्षरों में लिखे दवा के नाम मरीज को अप्रत्यक्षतः सन्देश देंगे कि उसका डॉक्टर जल्दी में नहीं है और उसका धैर्यपूर्वक पूरा ध्यान रख
रहा है .बस यही तो है एक चिकित्सक की सत्यम से शिवम् और फिर सुन्दरम तक की संछिप्त पर बेहद आवश्यक यात्रा जो उसके इस
पेशे को बहुत ही महान बनाती है.तभी तो मरीज अपने डॉक्टर को भगवान मानता है.

मेरे एक पहचान की महिला के साथ एक वाक्या हुआ.उनके चेहरे पर rashes हो गए थे.उन्होंने अपने फॅमिली डॉक्टर से consult
किया .दवा दूकान से उन्हें वही दवा नहीं दी गई जो डॉक्टर ने लिखी थी या यूँ कहिये उन्हें गलत दवा मिल गई पर कुछ महिलाओं में
इतना धैर्य कहाँ होता है कि कवर पर लिखे नाम से दवा का मिलान भी कर लें और वह भी चेहरे का मामला हो तो फिर तो बस और
भी जल्दबाजी हो जाती है…..अक्सर ऐसा होता है कि एक तो लापरवाही और दूसरे डॉक्टर के handwriting की वज़ह से लोग दवा के
कवर पर लिखे नाम को पर्ची परprescription लिखे उस नाम से मिलाने की ज़हमत नहीं उठाते .
खैर ,वह दवा रात सोने के पहले लगानी थी.अतः वे दवा लगा कर सो गई.मध्य रात्रि में चेहरे पर जलन से वे अर्ध निद्रा में ही उठीं
और चेहरे से दवा धोया पर सवेरे वे rashes और भी फ़ैल गए थे और कुछ दिनों बाद उनके चेहरे की गोरी रंगत स्याह हो गई.वे कुछ
ना कर सकीं. शिकायत भी क्या करती ?? फॅमिली डॉक्टर होने का लाभ उन साक्षर शिक्षित डॉक्टर को मिला.पर आज जब भी मैं उन
दीदी से मिलती हूँ तो यही ख्याल आता है “काश!वे डॉक्टर निरक्षर शिक्षित डॉक्टर होतीं !दीदी भी सावधान होती तो उनके चेहरे की वह
चमकती रंगत यूँ परिवर्तित हो कर विकृत न होती.
मैंने यह समाचार पढ़ा कि महाराष्ट्र राज्य के senior doctors ने लिखावट सुधारने की मुहिम चलाई है तो बहुत प्रसन्नता
हुई.मेडस्केप इंडिया नाम से ट्रस्ट बनाया गया है ताकि कैपिटल letters में स्पष्ट लिखावट के प्रति जागरूकता फैलाई जाए और इसके
ज़रिये दवा संबंधी गड़बड़ियों और मेडिकल practitioner को (illegible scribbles)कानूनी झंझट से बचाया जा सके.महाराष्ट्र
सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सुरेश शेट्टी जी ने कहा,”महाराष्ट्र मेडिकल कौंसिल अगर जन हित में कोई अभियान चलाती है तो सरकार उसे
पूरा समर्थन देगी.”

मेडस्केप इंडिया doctors के लिए इस दिशा में (HANDWRITING LEGIBILITY) कार्यशालाएं आयोजित करने जा रहा है.जिसके अंतर्गत
‘drug prescription लिखते वक्त doctors capital letters के साथ correct spellings पर भी ध्यान रखें. अगर
small letters प्रयुक्त किये जाएं तो उनका झुकाव(slant ) लगभग 15-20 डिग्री से अधिक न हो.इसमें भी विशेष रूप से O,E
और T की स्पष्टता(clearity ) पर ज्यादा ध्यान दिया जाये.doctors अपने contact number पर्ची में अवश्य दें ताकि किसी
भी असहुलियत में उनसे संपर्क किया जा सके.’

Maharashtra Medical Council,Dental Council,Neurologists Association ,Gynaecologists Association
,Homoepathy Council,Ayurvedic Council,Federation Obsteric And Gynaecological Society Of India(FOGSI)
जैसी 24 संस्थाओं से यह आग्रह किया गया है कि वे इस दिशा में पहल करें.एक सर्वेक्षण के अनुसार USA में इस असावधानी की वज़ह
से करीब 7000 मौत प्रत्येक वर्ष होती है. भारत देश में ऐसे आंकड़े उपलब्ध ही नहीं हो पाते .कारण स्पष्ट है कुछ तो इस ब्लॉग में
लिखी घटना सरीखी स्थितियां होती हैं और कुछ देश के लम्बी कानूनी कार्यवाही का भय.स्पष्ट सबूत (दवा की पर्ची ,chemist की रसीद
,दवा के पैकेट इत्यादि) होते हुए भी लोग शिकायत दर्ज नहीं कराते.

Medscape India की ग्रुप प्रेसिडेंट डॉक्टर सुनीता दुबे का कहना है “Due to lack of clarity in doctor’s written
prescriptions,the number of deaths caused in India and internationally are on a shocking
rise……….an incorrect drug is administered to the patient which a lot of time proves fatal or
nearly fatal.”

इस छोटे पर अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू पर जितना जल्दी कार्यान्वन हो उतना ही अच्छा है.फिर लिखावट की असावधानी के फलस्वरूप होने
वाली असामयिक मौत या दुर्घटना भी नहीं होगी,ना ही दीदी के साथ हुई लापरवाही की वज़ह से कोई मेरी तरह पूर्वाग्रही हो कर यह
सोचेगा,काश!वे doctor निरक्षर शिक्षित पेशेवर होती .. साथ ही लोक प्रचलित उपमा (as illegible as doctor’s
prescripion )भी लोगों की जुबां पर कभी नहीं होगा.

हाल के समाचार में सुना और पढ़ा कि अब प्रत्येक डॉक्टर को दवा के नाम पढ़े जाने योग्य कैपिटल अक्षर में लिखना अनिवार्य होगा
..साथ ही दवा के जेनेरिक नाम भी लिखने होंगे .सभी डॉक्टर ने इस बात का स्वागत किया है उनके अनुसार .हालांकि जहां एक डॉक्टर
के लिए मरीजों कि बाढ़ रहती है वहां इस नियम को अपनाने में वक़्त अवश्य लगेगा …साथ ही दवा के नाम कैपिटल अक्षर में लिखने
का यह कदम अतिरिक्त समय अवश्य लेगा पर मरीजों की सुविधा के लिए सराहनीय कदम होगा . Indian Medical
Association’s Dr. K.K. Aggarwal ने बताया कि केंद्रीय स्वस्थ्य मंत्रालय इस सम्बन्ध में जल्द ही नियम लाएगा जो पूरे देश में
मान्य होगा .केंद्रीय स्वास्थय मंत्री श्री जे पी नड्डा ने पहले भी संसद में यह माना था कि डॉक्टर्स द्वारा लिखे दवा के प्रिस्क्रिप्शन में ना पढ़े जाने योग्य लिखावट की वज़ह से मरीज को कठिनाई का सामना करना पड़ता है कभी कभी गलत दवा मिल जाने से मृत्यु का भी खतरा हो जाता है.
विश्व स्तर पर सभी doctors से हमारी अपील है कि वे इस दिशा में अवश्य सोचें और कितनी भी जल्दी हो पर prescription पर
दवा का नाम स्पष्ट handwriting में ही लिखें. वर्त्तमान डिजिटल युग में वे लिखने की आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर मरीजों को स्पष्ट प्रिस्क्रिप्शन आसानी से दे सकते हैं.आपकी यह सावधानी और संवेदनशीलता कई लोगों को सही दिशा दे कर मुसीबत से बचा
सकेगी.



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 25, 2015

आदरणीय यमुना पाठक जी अभिवादन । कमाल का लेख लिखा है आपने । ऐसे विषय पर इतने विस्तार से लिखा है कि बधाई देना तो बनता ही है । बहुत उपयोगी जानकारियां आपने साझा की हैं……..इसके लिए विशेष रूप से आभार ।

    yamunapathak के द्वारा
    September 2, 2015

    बिष्ट जी आपका atishay aabhar

sadguruji के द्वारा
August 23, 2015

आदरणीया यमुना पाठक जी ! बहुत अच्छा लेख ! बहुत बहुत बधाई ! आपने सही कहा है, असावधानी, जल्दबाजी और असंवेदनशीलता तीनों ही कारण हैं ! ज्यादा अच्छा हो कि कम्प्यूटर का प्रयोग किया जाये ! हालाँकि मेडिकल स्टोर वाले अब कम्प्यूटराइज्ड रसीद देने लगे हैं, परन्तु उसे ले जाकर फिर से व्यस्त और पेशेवर डॉक्टर को दिखाना सरल कार्य नहीं है ! अच्छे और नामी डॉक्टरों के यहाँ मरीजों की बहुत ज्यादा भीड़ और डॉक्टरों का सिर्फ रूपये बटोरने के पीछे भागना जग जाहिर है ! अच्छी प्रस्तुति हेतु सादर आभार !

Shobha के द्वारा
August 22, 2015

प्रिय यमुना जी आपने शायद एक चुटकुला नही सुना डाक्टर की पत्नी अपने पति का लिखा पत्र पढवाने कैमिस्ट के पास जाती हाँ यदि कैमिस्ट प्रस्क्रिपशन न पढ़ सके तो भगवान मालिक है |

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 22, 2015

उपयोगी आलेख आदरणीय यमुना जी,पढ़े लिखे लोग भी उनका राइटिंग नहीं समझ पाते,अनपढ़ों की क्या दशा होती होगी ,उम्मीद है डाक्टरों के हाथों की कलम होश में रहे और मरीजों का जीवन खतरे में न पड़े ,सादर


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