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ज़िंदगी और कुछ नहीं

Posted On: 5 Jul, 2015 कविता में

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प्रिय ब्लॉगर साथियों
यमुना का प्यार भरा नमस्कार
आज सिविल सर्विसेज परीक्षा का परिणाम सुनकर बहुत प्रसन्नता हो रही है .सर्वोच्च स्थान में आने वाली चार बेटियां फख्र से सर ऊंचा करने को प्रेरित करती हैं.१९ वर्षीय इरा सिंघल का सामान्य वर्ग से सबसे टॉप पर होना और भी द्विगुणित खुशी देता है .आज जब थोड़ी सी असफलता से घबरा कर कुछ विद्यार्थी आत्मघाती कदम उठा लेते हैं वहीं इरा अपनी अशक्तता के बावजूद अव्वल आ कर आज सभी विद्यार्थियों के लिए मिसाल बन गई हैं. आज अभिभावकों को हर हाल में अपने बच्चों के साथ खड़ा होना और उन्हें प्रेरणा देना बहुत ज़रूरी है.सच है ज़िंदगी बस अनुशासन का ही दूसरा नाम है.

१) बेटियां

किताब के पन्नों के बीच
गुलाब की पंखुरियों सी
दबी,छुपी,सूखती थी बेटियां
आज………….
आवरण पृष्ठ पर
सजे फूलों के मानिंद
खुशी बन झलक रही हैं .
………………..
घर के किसी एक
छुपे से कोने में बैठ
चादर काढती थीं बेटियां
आज……………
प्रगति के पूरे कैनवास को
ख़ूबसूरत इंद्रधनुषी रंगों की
जीवंतता से भर रही हैं.

२) मौलिकता

हर बच्चे का वज़ूद
होता है मौलिक
ध्वनि की तरह
ऊंचे-ऊंचे पहाड़ बना
अपने अपने सपनों के
हर वयस्क सुनना चाहता है उसे
एक प्रतिध्वनि की तरह
जिसमें गूँज तो होगी
पर मौलिकता नहीं .

३)ज़िंदगी और कुछ नहीं

ज़िंदगी और कुछ नहीं
साँसों की सजगता का ही
दूसरा नाम है
पीछे उठने वाले कदम को भी
हो ऐसी सजगता कि
थामने का सामर्थ्य हो
जो डगमगाए अगले कदम कभी .
…..
ज़िंदगी और कुछ नहीं
सूर्य से अनुशासन का ही
दूसरा नाम है
गर्व से उदित कर्तव्यनोन्मुख हो
रोशनी बाँट वक़्त से हो जाता अस्त
खिड़की कितनी कितने दरवाज़े खुले
दिए अर्क किसने किसने काव्य रचे
गिनने में समय व्यर्थ न किया कभी
……
ज़िंदगी और कुछ नहीं
मानसिक सम्पन्नता का ही
दूसरा नाम है
स्वयं को जानना समझना
अनुभवों के सार निचोड़ना
स्वस्तित्व के मायने तलाशना
संवेदनाओं से सामंजस्य बिठाना
गल्प,कथा,कहानियों में लेना
वास्तविकता के अर्थ भी
……………..

ज़िंदगी और कुछ नहीं
सहजता से बहने का ही
दूसरा नाम है
तेज हो धार कहाँ
हो कहाँ मंथर गति
चट्टानों के बीच से ही
क्यों ना बहना पड़े कभी
चाहे पड़ें राहें बदलनी
रोष तनिक न हो कभी
…..
ज़िंदगी और कुछ नहीं
प्यार सी सरलता का ही
दूसरा नाम है
कोई किसी को प्रेमवश भी
है बदलता नहीं कभी
प्रेम माध्यम बन जाता
होती पहचान अंतर्शक्ति की
खिल जाती छवि पंखुरी सी .
-



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
July 16, 2015

harishchandra jee aapke comment bahut hee symbolic hote hain ….aur motivate bhi karate hain ….aapkee pratikriya ke liye aapka atishay aabhar

yamunapathak के द्वारा
July 16, 2015

aadarneey jawahar jee aapke blog par comment post nahin hue aapka yah comment bhi mujhe spam mein mila aapne blog padha aapkee bahut bahut aabharee hun …fb mein malware aa gaya hai atah vahaan kuchh post karana sambhav nahin ho raha hai

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
July 6, 2015

यमुना जी याद आ रहा है ,वह गीत ….एक प्यार का नगमा है …जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी इक कहानी है । …याद आ रहा मोदी जी का ….सेल्फी विद डाटर ……..याद आ रहा है श्रुति सेठ का ….व्यंगात्मक टवीट…..प्रतिकि्या मैं भाजपाइयों का असंयमित प्रहार ….. ….कुछ भी हो मोदी जी अपनी विवाहिता को त्याग कर भी सेल्फी विद डाटर ..के अभियान मैं भी आराध्य हैं । …..कुछ भी हो ..लडकियों के लिए प्रोत्साहन तो है ही । और पॅोत्साहन पाकर लडकियाॅ संयमित होकर लडको को हर विधा मैं परास्त कर देती है । यही नहीं एक कुसल ग्रहणी के कर्तव्य को ऩिभाते ओम शांति शांति करती हैं ।

jlsingh के द्वारा
July 6, 2015

ज़िंदगी और कुछ नहीं प्यार सी सरलता का ही दूसरा नाम है– बहुत ही सही कहा है आदरणीया हर पंक्तियाँ करीने से सजाई हुई


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