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मायने वसंत के

Posted On: 24 Jan, 2015 Others,कविता,Junction Forum में

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मेरे प्रिय ब्लॉगर साथियों
वसंत पंचमी की बहुत सारी शुभकामना
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दुनिया की प्रत्येक वस्तु , परिस्थिति ,की तरह वसंत के आगमन के भी अपने मायने हैं…जितने लोग ….उतनी व्याख्या ….यह सच है कि वसंत सर्वप्रिय मौसम है ….पर इसके आगमन का अर्थ …इसका स्वागत ….इसकी स्वीकृति ….बहुत कुछ व्यक्ति विशेष के हालात,मनस्थिति,परिस्थिति और सबसे ज्यादा उसके वक़्त पर निर्भर करती है…


र पूछो क्या मायने वसंत के
सरसों की पीताभा लिए
सूरजमुखी सी आशा लिए
अमूमन हर चेहरा जाता है खिल
शीत के कपाट खोल जाता है मिल

ह उठता …आता ही नहीं
ले भी आया जाता है वसंत .

ूछा एक माँ की ममता से
मायने क्या हैं वसंत के ??
अपने बच्चे को निहार वह
कह उठी यही है वसंत .
पूछा एक प्रेयसी से ..
क्या तुमने भी देखा वसंत ???
कपोल की रक्ताभा समेटे
लब हँसे ..कहा..‘वह रहा वसंत’
पूछा एक कर्मयोगी से
कब आता है वसंत ???
हाथों के खुरदरेपन की छुअन में,
हिना के रंग सा दिखा वसंत .
पूछा एक किसान से
वसंत का होता कैसा रूप रंग???
सरसों की वासंती रंगत देख
फ़ैली हुई धानी चूनर ओढ
कहा,ये मैंने पा लिया वसंत .
पूछा एक सैनिक से
कहाँ छुपा है तुम्हारा वसंत ??
गर्व से वह बोल उठा ..
भारत माँ का लाल हूँ
रक्त की लालिमा में ही छुपा मेरा वसंत .

पूछा एक आम इंसान से
क्या होती हर वर्ष मुलाक़ात वसंत से ???
थोड़ा हंस, थोड़ा रो ,थोड़ा चल ,थोड़ा ठिठक
थोड़ा रूमानी,थोड़ा रूहानी हो
गहन चिंतन से उबर कर बोला …
………………….

वसंत सिर्फ मौसम नहीं
वसंत एक सोच भी है
ह्रदय में बसे वसंत में
एक अजीब लोच भी है
जब पूछता कोई यह
हैं क्या मायने वसंत के
वसंत की ही मर्ज़ी यह

कैसे खुद की अभिव्यक्ति दे !!!!



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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
February 4, 2015

वसंत सिर्फ मौसम नहीं वसंत एक सोच भी है,शायद तुलसी भी रामचरितमानस के प्रस्तावना में यही कहना चाहते – संत सभा चहुँदिशि अँवराई | श्रद्धा रितु बसंत सम गाई | बरनब राम बिबाह समाजू | सो मुद मंगलमय रितुराजू || सादर आभार आदरणीया ,एक कवि हृदय में सारी सृष्टि समाहित रहती है,जो आप की कृति में स्पष्ट दृष्टि गोचर होती |

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
February 2, 2015

यमुना पाठक जी अभिवादन व वसंत की शुभकामनाएं । बहुत सुंदर कविता लिखी है आपने । हर व्यक्ति के लिए वसंत का मतलब कुछ अलग तो होता ही है । व्यक्ति पर निर्भर है कि वह वसंत को कैसे लेता है अपने जीवन मे । सुदंर रचना ।

    yamunapathak के द्वारा
    February 2, 2015

    बिष्ट जी ब्लॉग पर आने का आपका अतिशय आभार

Shobha के द्वारा
January 31, 2015

प्रिय यमुना जी बेहद खुबसुरत कविता बसंत सिर्फ मौसम नहीं बसंत एक सौच भी हैं उत्कृष्ट विचार डॉ शोभा

    yamunapathak के द्वारा
    February 1, 2015

    आदरणीय शोभा जी आपका अतिशय आभार

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 31, 2015

पूछा एक प्रेयसी से .. क्या तुमने भी देखा वसंत ??? कपोल की रक्ताभा समेटे लब हँसे ..कहा..‘वह रहा वसंत…………..ओम शांति शांति

    yamunapathak के द्वारा
    February 1, 2015

    हरिश्चंद जी ब्लॉग पर आने का अतिशय धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
January 25, 2015

बहुत ही सुन्दर लगी आपकी कविता और भाव भी एक कविमन कहाँ तक सोच सकता है यही दर्शाती है यह कविता… वैसे सबका अपना अपना बसंत है… सुभद्रा कुमारी चौहान ने भी लिखा है, वीरों का कैसा हो बसंत ?

    yamunapathak के द्वारा
    February 1, 2015

    आदरणीय जवाहर जी आपकी पंक्तियाँ बहुत प्रेरक हैं ..आपका बहुत बहुत आभार


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