Aatamaabhivyakti

extremely CRUDE ; completely PURE

244 Posts

3093 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 9545 postid : 835495

इन्वेस्टमेंट फॉर डी ३ (डेमोग्राफी,डिमांड,डेमोक्रेसी)

  • SocialTwist Tell-a-Friend

प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में राजनीति ने अपने एकांगी स्वरुप को छोड़कर नए कलेवर को स्वीकार किया है जो सामाजिक,आर्थिक,सांस्कृतिक,वैज्ञानिक विकास की चतुर्दिक दिशाओं को दिशा देता हुआ स्वयं केंद्र में स्थापित है.

Desktop29जब मोदी जी इन्वेस्टमेंट फॉर डी ३ की बात करते हैं तो इसे (डेमोग्राफी,डिमांड,डेमोक्रेसी) पर आधारित बताते हैं .पर वे demography के मात्रात्मक पक्ष की बात करते हैं या गुणात्मक पक्ष की यह स्पष्ट नहीं होता है.मोदी जी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के विचारों से खासा प्रभावित दिखते हैं .

इसलिए यहां गांधी जी के आर्थिक विचारों का ज़िक्र ज़रूरी है.गांधी जी भारत की जनसँख्या के विषय में माल्थुशियस सिद्धांत के समर्थकों के इस बात से सहमत नहीं थे कि भारत में जनसँख्या अधिक है और बेकारी,अकाल,बीमारी अशिक्षा इसके प्रतीक हैं.गांधी जी का मानना था ‘भारत में जनसँख्या अधिक नहीं है बल्कि प्राकृतिक साधनों का विकास नहीं होने के कारण गरीबी और बेकारी है.अपने गांधी जी की बात मान ली जाए कि भारत में जनसँख्या अधिक नहीं तो भी उनके कथन के दूसरे भाग अर्थात प्राकृतिक साधनों के समुचित विकास की संभावनाओं पर विचार ज़रूरी है जिसके लिए मोदी जी की सरकार कृत संकल्प है .जो मेक इन इंडिया ,स्किल डेवलपमेंट ,विदेशी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में बढ़ने की तैयारी में है.आज एक तरफ मोदी जी डेमोग्राफी (मात्रात्मक या गुणात्मक )की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ साक्षी महाराज ,साध्वी प्राची चार चार बच्चे जन्म देने का सुझाव दे रहे हैं एक परिवार में बच्चों की संख्या कितनी हो यह परिवार की आर्थिक स्थिति ,परिवार में बच्चों की पहले से उपलब्ध संख्या पर निर्भर करता है.जब मेरा विवाह छह पुत्रों के संयुक्त परिवार के पांचवे पुत्र से हुआ तो वहां पहले से चार बड़े भाइयों के दो दो बच्चे (सभी के एक पुत्र और एक पुत्री )जन्म ले चुके थे जो आज भी दो तक सीमित हैं पर उनमें से दो भाइयों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी .यह देख कर मैंने एक संतान (पुत्री) तक संतोष किया ताकि अपनी पुत्री के साथ साथ घर के ज़रूरतमंद भाइयों के बच्चों को भी उचित शिक्षा और परवरिश में सहयोग कर सकूँ.आज मेरे विवाह को सत्रह वर्ष हो गए घर के लगभग सभी बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और हमारा सहयोग नित्य बना हुआ है बाद के छठे भाई की दो बच्चियां हैं. अपने परिवार की उन्नति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करने के साथ अपनी शिक्षा और सोच का उचित प्रयोग करना चाहती हूँ .मेरे दिवंगत पिता अक्सर कहते थे “बिटिया,शिक्षा का अर्थ सिर्फ धनार्जन ही नहीं बल्कि सही सोच के साथ जीवन जीना भी है …ऐसी सोच जिसमें सिर्फ तुम्हारी ही नहीं ..परिवार समाज देश का भी जीवन सही दिशा में जा सके शिक्षा का असली महत्व और उपयोगिता इसी सत्य में निहित है .”

मेरा मानना है कि आज भारत के जनसंख्या का अध्ययन जनसँख्या के आकार ,भारत भू भाग का आकार और प्राकृतिक साधनो की उपलब्धता तथा उसका समुचित विकास इन तीन बिन्दुओं पर करना ज़रूरी हो गया है.

demography is the study of changes in numbers of births,deaths,marriages,and cases of disease in a community over a period of time.

नई सरकार ने आर्थिक सुधारों का दौर शुरू किया है.विश्व बैंक ने भविष्वाणी की है कि भारत 2017  में विकास दर के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा .यह अच्छी बात है पर जनसँख्या बढ़ाने के लिए प्रेरित करते बयान भारत देश को जनसँख्या के मात्रात्मक पक्ष से भी चीन को पीछे छोड़ने की राह पर ना लेता जाए.

नसँख्या का आकार डिमांड को प्रभावित करता है. अधिक जनसँख्या अगर वह गुणात्मक दृष्टिकोण से अर्थात शारीरिक मानसिक आत्मिक आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ साथ ही कौशल विकास के साथ साक्षर और शिक्षित सशक्त नहीं है तो वह कम उत्पादकता का कारण होती है …कम उत्पादकता ….कम आय का कारण है और कम आय …..कम मांग के रूप में दिखाई देती है.ऐसी अर्थव्यवस्था में कम आय …..कम बचत ….और कम निवेश …को जन्म देते हैं जो पुनः …कम उत्पादकता के रूप में …विकास को अवरुद्ध कर देते हैं. जनवृद्धि  से खाद्य पदार्थ,कपड़ों,मकानों के लिए अवश्य मांग बढ़ती है.परन्तु सहयोगी साधनों कच्चे माल,कुशल श्रम,पूंजी के अभाव से लागतें और कीमतें बढ़ जाती हैं,जो सर्वसाधारण के के जीवन की लागत बढ़ा देती है रहन सहन का स्तर जो पहले से नीचे रहता है वह और भी गिर जाता है .दरिद्रता अवसाद को जन्म देती है मनोरंजन के विकसित साधनों का अभाव और शिक्षा की कमी यौन संबंधों को बढ़ावा देते हैं और बच्चों की बड़ी संख्या उपजती है जो दरिद्रता को और भी बढ़ा देती है और यह विषैला दुष्चक्र किसी भी गरीब परिवार को गरीब ही बनाये रखता है.यदि जनसँख्या में बच्चों की प्रतिशतता अधिक हो तो प्रति व्यक्ति आय पर जनवृद्धि के प्रतिकूल प्रभाव और भी कठोर हो जाते हैं.इसलिए गांधी जी का सुझाव था कि एक देश में उतनी ही जनसँख्या हो जिसका पालन पोषण उचित प्रकार से हो सके .देश को वैज्ञानिक तार्किक सोच वाली नैतिकता से परिपूर्ण पीढ़ी की ज़रुरत है.जो कुशल शिक्षित हो देश की आर्थिक राजनैतिक सामाजिक सांस्कृतिक विकास को सकारात्मक दिशा दे सके.मोदी जी की धन जन योजना बचत की आदत विकसित करने की दिशा में प्रसंशनीय कदम है .मानव स्वभाव से ही संग्रही प्रवृत्ति का होता है .अगर उसे बचत की आदत लग जाए तो वह अपने अनावश्यक खर्च (नशा,सामाजिक रस्म रिवाज़ के दिखावेपन ,परम्परा पर खर्च )में कटौती कर लेता है.अधिक बचत अधिक निवेश को जन्म देती है .
विकास के लिए पहले से उपलब्ध मात्रात्मक जनसँख्या के गुणात्मक विकास की सख्त आवश्यकता है .ऐसी आयोजित सामाजिक और स्वास्थय सुविधाएं जिनमें वे सब व्यय सम्मिलित हों जो लोगों की जीवन प्रत्याशा,कार्यक्षमता ,शक्ति ,तेज और ओज का विकास करे.शिक्षा ,कौशल प्रशिक्षण ,शुद्ध सुरक्षित पर्यावरण उपलब्ध कराये.आज काफी संख्या में इंजीनियर ,मिस्त्री ,सैनिक, चिकित्सक ,वैज्ञानिक,चालक,मैकेनिक , शिक्षक आदि की ज़रुरत है श्रम दक्षता को उन्नत करने के साथ ही साधन की गतिशीलता बढ़ाना ,उद्यमिता को बढ़ावा देना और इस क्रम में जन हित का ख्याल रखना तथा आधुनिक वैज्ञानिक सोच विकसित करना बहुत ज़रूरी है.मोदी जी की बात अभी तक व्यवहारिक रूप में कम ही असर दिखा रही है.ऐसे में मुझे अर्थशास्त्री शुल्ज़ का कथन याद आता है , “ऐसा प्रतीत होता है जैसे हमारे पास साधनों का मानचित्र हो पर उसमें महान नदी और उसकी शाखाएं ना हों.शिक्षा ,तकनीक ,कार्यरत प्रशिक्षण, सिंचाई सुविधा ,स्वास्थ्य सुविधाएं ,उन्नत वैज्ञानिक सोच और अर्थव्यवस्था की सूचना के बढ़ते स्टॉक उस विशिष्ट नदी का पोषण करते हैं.”

गांधी जी का मानना था “पैसे की कमी जनता के लिए इतनी भयानक नहीं जितनी कि कार्य में कमी क्योंकि इससे नैतिक पतन की पूरी संभावना रहती है.हमारे समक्ष यह समस्या नहीं कि गाँव में बसने वाले नर नारियों के लिए अवकाश कैसे प्राप्त करें अपितु समस्या यह है क उनके खाली समय का सदुपयोग कैसे करें .“.इसलिए उन्होंने चरखा कातने, चमड़े का काम ,चटाई बुनना, कृषि औजार बनाना .ऐसे कुटीर धंधों का महत्व समझा था.उनका कहना था “यंत्रीकरण तब ही उचित है जबकि कार्य के लिए श्रम बहुत कम हों परन्तु अगर काम के लिए अत्यधिक श्रमिक उपलब्ध हों जैसा भारत देश में है तो यह एक बुराई है.” हालांकि वर्त्तमान डिजिटल और तकनीक विकास की क्रान्ति के युग में यंत्रीकरण द्रुत गति से और अधिकाधिक कुशल गुणवत्ता युक्त उत्पादन के लिए अनिवार्य हो गया है फिर भी यह ध्यान देने योग्य बात है कि भारत की मात्रात्मक मानव सम्पदा का गुणात्मक विकास कर उसे यथोचित कार्य में लगा दिया जाए.प्रत्येक युवा और कार्य करने में सक्षम व्यक्ति कार्य करना चाहता है फिर चाहे वह शारीरिक काम हो या मानसिक काम हो .आवश्यकता उचित कार्य को उपलब्ध कराने और उस कार्य को सकारात्मक ढंग से उत्पादक बनाने के लिए स्वस्थ कार्य वातावरण उपलब्ध करने की है.शारीरिक श्रम को किसी भी स्तर पर मानसिक श्रम से काम ना आँका जाए.अर्थव्यवस्था के विकास के लिए दोनों का ही महत्व है.

झारखण्ड ,छत्तीसगढ़,जैसे राज्य में प्राकृतिक साधन प्रचूर मात्रा में हैं.जनसँख्या की मात्रा भी अच्छी है पर लोग अशिक्षित और रूढ़िगत परम्पराओं में जकड़े हैं.ऐसे राज्यों में प्राकृतिक साधनों का विकास ,शिक्षा और कौशल विकास की महती ज़रुरत है.युवाओं को नशे और अपराध से रोकने के लिए गाँव कस्बों शहर में मुर्गी पालन,शूकर पालन ,शहद उत्पादन,खाद्य प्रसंस्करण(आचार बड़ी पापड जैम सॉस चिप्स जूस ) जैसे लघु और कुटीर उद्योगों में लगा देना चाहिए.बाहर से आई कंपनियां लुभावने पैकेजिंग में इन सामानों को ऊंचे दामों पर बेचती हैं और लाभ अपने देशों में ले जाती हैं .ऐसे में देश की डेमोग्राफी कैसे लाभान्वित हो .इन लघु उद्योगों में मेक इन इंडिया के साथ देश की जनता के हित को सोचा जाना भी ज़रूरी है.ऐसे राज्यों में कई कारखाने भी खुलते हैं पर स्थानीय नेताओं के प्रभाव और श्रमिकों में शिक्षा और जागरूकता के अभाव में धरना प्रदर्शन हड़ताल आम बात होते हैं ऐसे क्षणों में सही अर्थों में डेमोक्रेसी की बात आती है.जैसा गांधी जी का मत था .वे जनता की शक्ति में विश्वास करते थे .इसके सम्बन्ध में वे स्वयं लिखते हैं ,“राज्य की बढ़ती शक्ति को मैं भय के साथ बुरी निगाह से देखता हूँ .अगर श्रमिक और पूंजीपति में झगड़ा हो तो फैसला करने के लिए राज्य हस्तक्षेप ना करे बल्कि वे दोनों ही आपस में समझौते करने के लिए सक्षम हों .”पर वे आर्थिक विकास में मानव मूल्य को बहुत महत्व देते थे..भूमि के स्वामित्व के विषय में उनका रूख स्पष्ट था “भूमि ईश्वर की है.उस पर अपने श्रम का उपयोग करने वाले व्यक्ति का ही अधिकार होना चाहिए.”
हालांकि मोदी जी की सरकार श्रम कानूनों में सुधार के लिए तैयार है .यह भी निवेश की दिशा में ठोस कदम होगा .

इन्वेस्टमेंट फॉर डी ३ (डेमोग्राफी,डिमांड,डेमोक्रेसी) की अवधारणा बहुत उत्कृष्ट है पर इसका नैतिक और मानव पक्ष स्पष्ट रहना चाहिए गांधी जी ने कहा था “नैतिक और भावात्मक मूल्यों की उपेक्षा करने वाला अर्थशास्त्र मधुमक्खी के छत्ते के समान है जिसमें जीवन होते हुए भी एक सजीव मांस के जीवन का अभाव है.”



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

12 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
January 23, 2015

प्रिय यमुना जी आप का लेख पढ़ कर समझना पड़ता है जब समझ मैं आ जाता है कितनी सरल भाषा मैं आपने बहुत बड़ी अर्थशास्त्र की बात समझा दी गाधीं जी जनता से जुड़े थे वह हर बात को सर्ब साधारण की नजर से देखते थे आपके अंतिम पैरे में गांधी जी का सटीक उदाहरण दिया गया लेख उत्कृष्ट कोटि का था बड़ी ही मेहनत से लिखा गया था आप अपने विचार को दिमाग मे ठोक देती है समझ जाने पर पता चलता हैं सर्व साधारण के लिए लिखा गया लेख है डॉ शोभा भरद्वाज

    yamunapathak के द्वारा
    January 24, 2015

    आदरणीय शोभाजी आपका बहुत बहुत धन्यवाद ….जब से मोदी जी का भाषण सुना था मैं समझ नहीं पा रही थी डेमोग्राफी को बाजार के अनुकूल बनाये बिना निवेश को कैसे आकर्षित किया जा सकता है ….भारत में श्रम का आधिक्य है पर उसके कौशल विकास की निहायत ज़रुरत है. साभार

sadguruji के द्वारा
January 21, 2015

भारत में जनसँख्या अधिक नहीं है बल्कि प्राकृतिक साधनों का विकास नहीं होने के कारण गरीबी और बेकारी है ! आज एक तरफ मोदी जी डेमोग्राफी (मात्रात्मक या गुणात्मक) की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ साक्षी महाराज ,साध्वी प्राची चार चार बच्चे जन्म देने का सुझाव दे रहे हैं ! आदरणीया यमुना पाठक जी ! बहुत परिश्रम से लिखा गया बहुत उत्तम लेख ! बहुत बहुत बधाई ! लेख को समझने के लिए थोड़ा ध्यान से पढ़ना पड़ा ! आपने एक कुशल अर्थशास्त्री की भांति ये लेख लिखा है ! इस बात में कोई संदेह नहीं कि भारत में गरीबी का मुख्य कारण प्राकृतिक साधनों और मानव श्रम का पूरा सदुपयोग न हो पाना ही है ! हिन्दू संगठनों द्वारा चार बच्चे पैदा करने का सुझाव महज एक कूटनीतिक चाल है ताकि एक समान नागरिक संहिता देश में लागू करने के लिए सरकार और संसद पर दबाब बनाया जाये ! हिन्दू तो परिवार नियोजन का पालन कर ही रहे हैं, पर उन्हें कौन समझाए जो परिवार नियोजन का पालन कर ही नहीं रहे हैं? मंच पर सर्वोत्तम प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई !

    yamunapathak के द्वारा
    January 21, 2015

    आदरणीय सदगुरू जी आपकी प्रेरणास्पद टिप्पणी का अतिशय आभार ….मोदी जी की कुछ बातें वाकई अस्पष्ट लगती हैं …हालांकि युवाओं को प्रोत्साहित करना …जमीनी सच्चाई से जुड़े मुद्दों को छूना उन्हें आम जनता के करीब लाता है पर सच्चाई तो यह है कि आम जनता की शिकायत my gov के माध्यम से हो या twitter से उस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता .आज फ़लकनामा के एक कोच में घटी घटना को तीन महीने हो गए कोई कार्यवाही नहीं हो रही सफर असुरक्षित है ….सड़क पर महिलाएं महफूज़ नहीं हैं…. खैर कुछ कार्य उनके काबिले तारीफ हैं ….देश विदेश में भारत का गौरव वापस लौटा है ….शाशन पारदर्शी हुआ है …. आपका अतिशय धन्यवाद

pkdubey के द्वारा
January 20, 2015

आदरणीया ,आप का आलेख विस्तृत अवश्य है ,पर हर पंक्ति अगली पंक्ति को पढ़ने की ललक को बढ़ाती है ,एक बच्चे को सुचरित्र बनाना अवश्य ही गर्भधारण और प्रसव से भी अधिक कष्टकारी और तापसी कार्य है ,तभी कबीरदास जी ने लिखा – गुरु कुम्हार ,सिख कुम्भ है ,गड़ी-गड़ी काढ़ै खोट | अंतर हाथ सहाय दे ,बाहर मारे चोट || नहीं तो मनुष्य रूपे मृगा इव चरन्ति का ही जीवन हो जाता है |

    yamunapathak के द्वारा
    January 20, 2015

    दुबे जी आपकी प्रेणास्पद प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार आपकी बातों से पूर्णतः सहमत हूँ.

jlsingh के द्वारा
January 20, 2015

आदरणीया यमुना जी, सादर अभिवादन! आज के सन्दर्भ में बहुत ही उपयागी आलेख प्रस्तुत करने के लिए आपका अतिशय अभिनंदन …वास्तव में ऐसे आलेखों का प्रचार प्रसार अत्यधिक होना चाहिए. निश्चित ही आज आलेखों, में भी गुणात्मकता की सख्त आवश्यकता है. केवल बातें रखना और तर्कसंगत, उदाहरण के साथ विषय की गंभीरता के साथ विश्लेषण का अंदाज आपका काफी सहरानीय है. मैं आपसे अनुरोध करता हूँ की इस आलेख को दूसरे मंचों पर भी प्रकाशित अवश्य करें. सादर!

    yamunapathak के द्वारा
    January 20, 2015

    आदरणीय जवाहर जी नमस्कार आपकी प्रेरणास्पद प्रतिक्रिया के लिए आप का बहुत बहुत आभार. यह सच है की मोदी जी की सोच नीतियां बहुत अच्छी हैं पर यह व्यवहारिक रूप में कैसे स्पष्ट हो ..जब वे डेमोग्राफी के बल पर निवेश करने को आमंत्रित कर रहे हैं तो इस डेमोग्राफी शब्द से उनका क्या तात्पर्य है…भारत जनसँख्या के मामले में (मात्रात्मक रूप )विश्व में दूसरा स्थान रखता है पर गुणात्मक रूप से तैयार नहीं यह भी ठीक कि युवाओं कि संख्या ज्यादा है जो श्रम (मानसिक /शारीरिक)बन कर उभर सकते हैं पर इस युवा मानव सम्पदा का विकास और उन्हें देश विश्व बाज़ार के अनुकूल तैयार करना है.डिग्री धारी पढ़ाई बहुत हो गई इससे बेरोजगारी का कुछ भी समाधान नहीं निकलता ,पहले इन युवाओं को तैयार किया जाए फिर आवश्यकतानुसार ही नए बच्चों कि संख्या बढ़ाने की बात हो .और अधिक जनसँख्या हमेशा मांग बढ़ाएगी यह भी ज़रूरी नहीं ….एक निर्धन परिवार में मांग किस वस्तु की बढ़ेगी ..खाद्यान्न की …जब तक जनसँख्या पर नियंत्रण न होगा आर्थिक स्तर नहीं बढ़ेगा और आर्थिक स्तर निम्न रहने से मांग भी काम ही रहेगी. मोदी जी डेमोक्रेसी को भी निवेश के साथ जोड़ कर देखते हैं …इस सच्चाई से उन्हें अवश्य वाकिफ होना चाहिए की आज जहां कारखाने लगे हैं …स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में अशिक्षित श्रमिकों द्वारा धरना प्रदर्शन हड़ताल आम बात हो गई है …इससे निवेशकर्ता भी घबराते हैं .एक सुरक्षित वातावरण के बिना निवेश संभव नहीं.अभी मैने खोलने की बात हुई है यह सराहनीय कदम है . आपका पुनः धन्यवाद साभार साभार

January 18, 2015

आप जैसी समझ अगर इनके नेताओं में होती तो इस देश का वास्तव में भला हो जाता .सार्थक अभिव्यक्ति .आभार

    yamunapathak के द्वारा
    January 19, 2015

    शालिनी जी नेता आम जनता से ज्यादा समझदार हैं इसलिए तो नीतियां बनाने की क्षमता रखते हैं ….आम जनता का उन्हें सहयोग चाहिए होता है छोटे स्तर पर ही सही पर आम जनता की जागरूकता ज़रूरी है. साभार

Santlal Karun के द्वारा
January 17, 2015

आदरणीया यमुना जी, ज्वलंत तथ्य और कथ्य पर बहुत ही रोचक ढंग से प्रासंगिक विचार इस आलेख में आप ने प्रस्तुत किया है, हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    yamunapathak के द्वारा
    January 18, 2015

    आदरणीय सर jee ब्लॉग पर आने का आपका अतिशय आभार


topic of the week



latest from jagran