Aatamaabhivyakti

extremely CRUDE ; completely PURE

250 Posts

3091 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 9545 postid : 835503

अज़ब अदब और सलीके का यह शहर है

Posted On: 13 Jan, 2015 कविता,lifestyle,Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Copy (2) of SDC16026अज़ब अदब और सलीके का यह शहर है
िज़ा में घुला मीठा अमृत सा कुछ जहर है .

बोलो तो मौन की परिभाषा समझाता है
खामोशी में कुछ अनकहा तलाश जाता है

शोरे खामोशी का मचा कैसा यह कहर है …
अज़ब अदब और सलीके का यह शहर है .

उड़ान है तो पदचिन्ह का अभाव बताता है
चलो ज़मीं पर तो राहों में कांटे बिछाता है

कदमों औ पंखों पर बैठी कैसी यह पहर है
अज़ब अदब और सलीके का यह शहर है .

अकेले चलो तो कारवां का दम दिखाता है
शरीके कारवां हो तो साये से कतराता है

राहों पर अपनी भी हुई ऐसी एक ठहर है
अज़ब अदब और सलीके का यह शहर है .

पलकें भीगी तो अपना वाक्या सुनाता है
लब हँसते हों तो कब जाल बिछा जाता है

दरिया ने समंदर को दी कैसी यह लहर है
अज़ब अदब और सलीके का यह शहर है
.

दस्तक दो तो कॉल बेल खराब बताता है
दूर हो तो व्हाट्सप्प व FB पर तलाशता है

आपसी रिश्तों की बनी कैसी यह नहर है
अज़ब अदब और सलीके का यह शहर है.

-यमुना पाठक



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

12 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
November 3, 2015

आपकी कविता एक ओर अत्यंत मर्मस्पर्शी है तो दूसरी ओर विचारोत्तेजक भी । हार्दिक अभिनंदन यमुना जी ।

    yamunapathak के द्वारा
    November 4, 2015

    maathur jee aapka bahut bahut aabhar

pkdubey के द्वारा
January 20, 2015

आदरणीया ,आप की हर पंक्ति में अजब अदब और सलीका बहुत गहराई से समाया हुआ है |सादर आभार | पलकें भीगी तो अपना वाक्या सुनाता है लब हँसते हों तो कब जाल बिछा जाता है

    yamunapathak के द्वारा
    January 20, 2015

    दुबे जी आपका अतिशय आभार

Shobha के द्वारा
January 19, 2015

प्रिय यमुना जी आपने बहुत भाव पूर्ण आज के मैटीरियलिज्म को सामने रख कर शहर का चित्र खींचा है सुन्दर भाव से पूर्ण कविता डॉ शोभा

    yamunapathak के द्वारा
    January 20, 2015

    शोभा जी आपका बहुत बहुत आभार

drashok के द्वारा
January 19, 2015

श्री यमुना जी बहुत सुंदर कविता ‘ आपसी रिश्तों की बनी कैसी यह नहर है ,अजब अदब और सलीके का यह शहर है अतिसुन्दर डॉ भारद्वाज

    yamunapathak के द्वारा
    January 20, 2015

    अशोक जी यह सच है आज आपसी सम्बन्ध बहुत भटके हुए से हैं . ब्लॉग पर आने का बहुत बहुत आभार

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 14, 2015

दरिया ने समंदर को दी कैसी यह लहर है अज़ब अदब और सलीके का यह शहर है . बहुत खूब लिखा है आपने यमुना जी .आभार

    yamunapathak के द्वारा
    January 20, 2015

    शिखा जी ब्लॉग पर आने का बहुत बहुत आभार वैसे एक बात सच कहूँ जिन दो लाइन को आपने और अशोक जी ने चुना है वही दो लाइन यह ब्लॉग लिखते समय मेरे भी दिल के बहुत करीब थीं …अच्छा लगा मेहनत सार्थक ही आप का अतिशय आभार

Bhola nath Pal के द्वारा
January 14, 2015

यमुना जी ! क्या खूब कहा I वाह, बहुत अच्छे बोल i बधाई ………….

    yamunapathak के द्वारा
    January 19, 2015

    भोला नाथ जी आभार


topic of the week



latest from jagran