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साब!कुछ पैसे दे दो…..

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बच्चा पार्टी …. हँसते खिलखिलाते बच्चे …..बरबस ही हमारा ध्यान खींच लेते हैं .धनिक के बच्चे अपनी स्वस्थ खूबसूरत दमकते चेहरों की मासूमियत से तो निर्धनों के दयनीय मासूमियत से अनजाने ही बहुत कुछ कह जाते हैं .और अगर बच्चा किसी भिखारिन के गोद में हुआ तो हमारी करूणा संवेदना उस बच्चे के प्रति और बढ़ जाती है.अगर बच्चा अपाहिज अँधा और जले कटे चेहरे वाला है तो हमारी संवेदना दुगुनी चौगुनी हो जाती है.अनायास ही हमारे हाथ या तो जेब में या फिर पर्स में तेजी से चंद सिक्के तलाशने लगते हैं .बस यहीं हम बहुत बड़ी गलती कर बैठते हैं और बच्चे की पीड़ा और मुसीबत को अनजाने में ही और बढ़ा देते हैं.ऐसा कर हम उस गिरोह के अपराध को और भी मज़बूती देते हैं जो कि बाल अपहरण और तस्करी से सम्बन्ध रख कर बाल भिक्षावृत्ति को अंजाम देता है . beggarडेल्ही पुलिस ने एक योजना बनाने की सोची है जिसके तहत ऐसे बच्चे जो भिखारिनों के गोद में या भिखारियों के साथ होते हैं उनका डीएनए टेस्ट कर यह पता किया जाए कि वे उनके असली बच्चे हैं या नहीं.एक नागरिक के द्वारा पीएमओ ऑफिस में मेल लिखने के बाद यह विचार किया गया है.प्रधान मंत्री जी ने यह मेल पुलिस कमिश्नर B  S Bassi  को भेजा.अक्सर ऐसा होता है कि बच्चे की शक्ल भिखारिन से नहीं मिलती है.यह सच भी है  कि भिखारिन औरतें जो बच्चों को गोद में ली रहते हैं वह उन्हें किराए पर माफिआ देते हैं .कभी कभी वे बच्चे के लिए दूध देने की भीख मांगती हैं ,कभी कभी दूध बेचने वाला भी इन से मिला होता है यह नशे मिला दूध देता है जिसे पीकर बच्चा बेसुध गोद में पड़ा रहता है और उसकी दयनीय दशा आम आदमी कि संवेदना बढ़ाने में कामयाब हो जाती है. हालांकि इस योजना में एक पेंच यह है कि किसी व्यक्ति विशेष के सहमति के बिना डीएनए टेस्ट करना व्यक्तिगत निजता का उल्लघन होगा .दूसरी अहम बात कि किसी को भी संदेह होने पर भी यूँ ही रोक कर कर टेस्ट करने का कोई औचित्य नहीं माना जा सकेगा .एक NGO के ऑफिसर का कहना है कि वह स्त्री दावा कर सकती है कि यह किसी असहाय का बच्चा है या फिर किसी साथी भिखारिन का जिसकी मृत्यु हो गई है और पुलिस के पास इस बात का शायद ही कोई काट्य हो पाये. फिर भी बाल भिक्षावृत्ति को रोकने बाल अधिकार की रक्षा करने की दिशा में इस पहल की अल्प भूमिका अवश्य ही हो सकती है.भारत ही नहीं विश्व के कई अन्य देश जैसे बोलविया ,फ़िलीपीन्स,बांग्लादेश सेनेगल पाकिस्तान,ऑस्ट्रिया के बच्चे भी इस मुसीबत से गुजर रहे हैं.US state dept रिपोर्ट के अनुसार शेज़वान चीन में एक व्यक्ति $ 40,000 एक वर्ष में बालभिक्षवृत्ति के द्वारा कमा लेता है वहीं भारत में एक बस स्टॉप पर हर महीने एक अपाहिज बाल भिखारी के द्वारा 5000 तक आसानी से कमा लिया जाता है.ऐसे बाल भिखारियों पर नज़र रखने के लिए बूढ़े भिखारी भिखारिन या गैंग का कोई आदमी आस पास ही होता है.भारत देश में लगभग 60,000 बच्चे लापता हो जाते हैं.उन्हें ऐसे गिरोह बेबस अपाहिज और दयनीय बना देते हैं .आँखें निकाल लेना,अंग काट देना,एसिड से चेहरे को जला देना,नशे अफीम के डोज़ देकर उनकी पहचान उनके ज़ेहन से हटा देना ,साथ ही गैंग मास्टर उन पर आसानी से नियंत्रण रख सके इसके लिए चरस अफीम का आदी बना देना और शारीरिक मानसिक रूप से इतना कमज़ोर कर देना कि वे भाग ना पाएं ,अपने परिजन को देख कर भी ना पहचान पाएं ….ऐसे गिरोहों का घृणित अपराध होता है.slumdog millionair मूवी में इस सच्चाई को बहुत प्रभावकारी ढंग से फिल्माया गया था . सन 2006 में एक समाचार चैनल ने एक डॉक्टर को दिखाया था जिसने इस कुकृत्य से जुड़े माफिया के कहने पर $ २०० में एक स्वस्थ बच्चे के अंग काटने को अंजाम दिया था.ऐसे भिखारी बच्चों को भिखारिनों के गोद में ,किसी भिखारी के साथ या फिर अकेले ही देखा जा सकता है .इन बच्चों को विशेष तरह के लोगों की तरफ भिक्षा माँगने भेजा जाता है जैसे पर्यटक ,स्त्रियां,अमीर और विशेष स्थानों पर जैसे रेलवे स्टेशन,बस स्टॉप,ट्रैफिक सिग्नल ,पर्यटक स्थान ,मंदिर मस्जिद के सामने भेजा जाता है क्योंकि धार्मिक स्थलों पर नेकी करने का भाव हमें इन्हे पैसे देने को प्रेरित करता है.पर्यटक चूँकि घूमने के साथ साथ अच्छे मूड में होते हैं कुछ अच्छा नेक काम करने की सोच से चंद सिक्के इनकी कटोरी में डाल कर अपने अच्छे मनुष्य होने के भाव से तृप्त हो जाते हैं.ट्रैफिक सिग्नल पर हर व्यक्ति जल्दी में होता है वह कुछ सिक्के डाल कर इस मुसीबत से निजात पाना चाहता है .यह भी सही है कि अगर ऐसे बच्चे पैसे नहीं ले जा पाते तो इन्हे बुरी तरह प्रताड़ित भी किया जाता है. अक्सर ऐसा होता है कि अगर आप इन भिखारी से दिखते बच्चों को भोजन फल देने की कोशिश करो तो वे इंकार करते हैं .यही पहचान है कि वे किसी माफिआ के द्वारा सताए बच्चे हैं.उन माओं पर क्या गुजरती होगी जो बड़े लाड प्यार से बच्चे को पालती हैं और दुर्भाग्यवश बच्चा ऐसे किसी ऐसे गिरोह के चंगुल में फंस जाता है .जो बच्चों से भिक्षावृत्ति और वैश्यावृत्ति करवाते हैं .यह भी सही है कि कुछ बच्चे गरीब परिवार के होते हैं जिनके अभिभावकों को पैसे का लोभ दिखाकर बच्चे खरीद लिए जाते हैं,कुछ बच्चे स्वयं ही गरीबी या पिता के नशे की आदत माता पिता के घरेलू झगड़ों से परेशान हो घर छोड़ कर भाग जाते हैं पर नियति उन्हें इस मकाम पर लाकर और भी बुरी दशा में जीने को मज़बूर कर देती है . .कभी -कभी ऐसा भी होता है कि ऐसे बच्चे बचा लिए जाते हैं किसी अनाथालय या बाल गृह में भेजे जाते हैं पर माफियाओं का समूह पुनः उनका अपहरण या उनकी तस्करी कर देता है .कुछ बच्चे तो इतना डरे सहमे रहते हैं कि उनकी अपंगता का कारण पूछने पर वे अपनी व्यथा बताने से डरते हैं और इसे किसी दुर्घटना का परिणाम बताते हैं . फिर भी अगर ऐसे बच्चों को हम बचाना चाहें तो कुछ कदम ज़रूरी हैं… 1) हमारा मन बाल भिखारियों को देख कर कितना भी द्रवित हो उन्हें चिल्लर चंद सिक्के देना बंद करें .ऐसा कर हम एक छोटे हद तक ही सही पर इस बाल भिक्षावृत्ति को रोक सकते हैं. 2)बाल भिखारी को चिल्लर देने के बजाये ऐसे सरकारी या निजी NGO जो हॉस्टल चलाते हैं या फिर बचाये ऐसे बच्चों की स्वास्थय शिक्षा भरण पोषण का इंतज़ाम करते हैं उन्हें दान दिया जाए.चार जनवरी को प्रकाशित दैनिक जागरण अख़बार में अंजना राजगोपालन के विषय में पढ़ा जो सड़क पर भीख माँगते बच्चों को देख कर दुखी हो जाती थीं .रजत नाम के अनाथ लडके को बचा कर किराए के घर में जगह देने की जो शुरुआत उन्होंने की आज ४०० के संख्या के करीब अनाथ बच्चों को सही जीवन दे रही हैं. 3) ऐसे विश्वस्त NGO जो इस तरह के बच्चों को बचाने का काम करते हैं उनके द्वारा ऐसे बच्चों की मदद कर सकते हैं. 4) पूरे भारत वर्ष में चाइल्ड हेल्प लाइन २४ घंट खुली जिसका नंबर है 1098 साइट है …(http://childlineindia.org.in) 5) सरकार के द्वारा बने क़ानून सख्ती से पालन किये जाएं… Anti Child labour and child protection act Juvenile justice (care and protection of children)act 2006 sec 24 and human trafficking act Right of children to free and compulsory education act 2009 The child labour (prohibition and regulation ) act 1996. हम आप अपने बच्चे के प्रति भी सजग हों .भूल कर भी बच्चे से सम्बंधित कोई updates सोशल साइट्स पर ना डालें फेसबुक पर तस्वीर ना शेयर करें या फिर प्राइवेसी सिक्योरिटी का ध्यान रख कर ही ऐसा करें बच्चे नुमाइश की वस्तु नहीं हैं उनकी निजता के अधिकार की रक्षा करना हमारा कर्त्तव्य है . च्चे किसी के भी हों उनके बचपन की रक्षा और सम्मान करना प्रत्येक जागरूक और संवेदनशील इंसान का कर्त्तव्य है.चार संकलित पंक्तियाँ लिख रही हूँ…..

एक रात गाती है ऊंचे प्रासादों में
एक रात सोती है गंदे फुटपाथों में
रात वही होती है हर बात वही होती है
रंग बदल कर केवल जीवन को धोती है.

(जानकारी नेट से साभार )



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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Imam Hussain Quadri के द्वारा
January 30, 2015

bahut hi sahi darshaya aapne aaj kal ke halaat ko magar afsos hai ke ham aaj tak sirf padhte aur likhte aa rahe hain magar is par kuchh karte nahi hain bahut achha likha aapne

    yamunapathak के द्वारा
    January 30, 2015

    आदरणीय इमाम जी आपकी बातों से सहमत हूँ. साभार

OM DIKSHIT के द्वारा
January 29, 2015

आदरणीया यमुना जी, नमस्कार. आप की बात विचारणीय है.भीख मांगने वाले विदेशों में भी हैं.मैंने यूरोप में रूमानिया के बच्चों के साथ औरतों को भीख मांगते देखा है.यू.एस. में भी भिखारी पट्टियां लिए सड़कों पर या किसी स्टोर के सामने कुर्सी पर बैठे दिखाई पड़ जाते हैं.लेकिन उनकी संख्या कम है.भारत में तो यह बहुतायत में देखने को मिल जाता है,क्योंकि यहाँ दानियों की संख्या भी कम नहीं है.इसका लाभ धंधे -बाज़ों द्वारा उठाया जाता है.

    yamunapathak के द्वारा
    January 30, 2015

    दिक्सित जी आप की टिपण्णी एक नई जानकारी देती है ब्लॉग पर आने का आपका अतिशय आभार

Bhola nath Pal के द्वारा
January 25, 2015

यमुना पाठक जी !संग्रह एवं संयोजन का श्रम अगणित गुना शौदार्य एवं संवेदना लेकर प्रमुदित हुआ अच्छा चित्रण ………..

    yamunapathak के द्वारा
    January 30, 2015

    आदरणीय सर जी आपका अतिशय आभार

तेज पाल सिंह के द्वारा
January 25, 2015

बच्चे देश का भविष्य होते हैं|उन्हें भिखारी बना देना एक अपराध है|इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के हवाले करना हर नागरिक का फर्ज़ होना चाहिए और ऐसे बच्चों का उचित पालन-पोषण होना चाहिए| 

    yamunapathak के द्वारा
    January 30, 2015

    तेजपाल जी आपका अतिशय धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
January 24, 2015

बहुत बहुत बधाई! आदरणीया यमुना जी! आप ऐसे ही नए नए विचार प्रस्तुत करते रहें ..कुछ लोग तो जरूर ही प्रभावित होते हैं… सादर!

    yamunapathak के द्वारा
    January 24, 2015

    आदरणीय जवाहर जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद

sadguruji के द्वारा
January 23, 2015

बहुत विचारणीय लेख मंच पर प्रस्तुत करने के लिए हार्दिक बधाई ! मेरे विचार से तो सरकार को भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाते हुए भिखारियों की छानबीन कराये ! जो बच्चे अपहृत कर लाये गए हों, उन्हें उनके घर पहुंचाए ! यदि भिक्षावृत्ति पर सरकार रोक लगा दे तो बच्चों का शोषण भी बंद हो जायेगा ! बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक चुने जाने के लिए बधाई !

    yamunapathak के द्वारा
    January 23, 2015

    सदगुरू जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद ….सम्मानित मंच की आभारी हूँ जिन्होंने साप्ताहिक ब्लॉग में इस विषय का चयन किया मुझे संतोष है कि यह बात अधिकाधिक लोगों तक पहुँच सकेगी कि वे बाल भिक्षुकों को दया वष चिल्लर ना दें इससे हम उनका कोई भला नहीं करते बल्कि ऐसे गलत चीज़ों को बढ़ावा देते हैं और जो लोग जान बूझ कर इस धंधे को अंजाम दे रहे हैं उनका हौसला बुलंद होता है .नेता चुनाव लड़ते है ….पर किसी नेता का ध्यान इन बच्चों पर नहीं जा पाता …अमूमन सब की गाड़ियों के पास ट्रैफिक पर सड़क के किनारे मंदिर के बहार ये बच्चे दिख जाते हैं पर इसे उनका नसीब समझ चंद चिल्लर डाल लोग आगे बढ़ जाते हैं और ये बच्चे पुनः वहीं रूक जाते हैं कभी आगे ना बढ़ने के लिए . आपका अतिशय आभार

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
January 23, 2015

साप्ताहिक सम्मान के लिए आपको बधाई और उपेक्षित भिखारी बच्चों की जिंदगी पर इस अच्छे लेख के लिए आप को हार्दिक ध्न्यावाद । सभी पहलूओं पर आपने अच्छा प्रकाश डाला है । बहरहाल डी.एन.ऍ टेस्ट तो इसका समाधान कतई हो नही सकता लेकिन सरकार को सोच समझ कर एक नीति बनानी ही होगी । आखिर यह एक मानवीय समस्या है और इसका एक अपराधिक पहलू भी है ।

    yamunapathak के द्वारा
    January 23, 2015

    बिष्ट जी आपका अतिशय धन्यवाद बच्चे किडनैप होते हैं कुछ स्वयं ही माता पिता की गरीबी के शिकार हो बाल भिक्षवृत्ति का हिस्सा बन जाते हैं …कोई सरकार बन जाए यह समस्या हल नहीं हो पा रही.हम इन्हे दया वष चिल्लर न दें इस तरह यह धंधा हतोत्साहित हो सकता है . आपका अतिशय आभार

Imam Hussain Quadri के द्वारा
January 6, 2015

bahut hi dard bhare haqiqat ko samne rakha aapne kash ham aaj idhar udhar ki baton par apna samay nasht karne ke bajaye aise binduon par chinta karen aur ek muhim chalayen to samaj ki achhi sewa ho sakti hai agar hamara dil aur hamari niyat saaf ho jaay to ye mumkin hai . bahut hi behtar koshish ke liye shukriya

    yamunapathak के द्वारा
    January 7, 2015

    आदरणीय सर sadar namaskar आपकी बातों से सहमत हूँ.बहुत सारी बातें या बिंदु ऐसे हैं जहाँ हमारा एक छोटा कदम ही कुछ अंश तक प्रभावकारी हो सकता है .इस अनुपम मंच ने हमें जीने की राह दी है. साभार

pkdubey के द्वारा
January 6, 2015

आदरणीया मेरे विचार से इस देश में भीख मांगना ही बंद करवाया जाये और ऐसे सरकारी व्यवस्था की जाये जहाँ भूले-भटके,दीन -दुखी अपना पेट भरें और अपनी उम्र के अनुसार कुछ कार्य करें | मेरी समझ से साध्वी ऋतम्भरा इस दिशा में अच्छा कार्य कर रही हैं |

    yamunapathak के द्वारा
    January 6, 2015

    दुबे जी आपकी बात से सहमत हूँ विशेष कर बाल भिक्षावृत्ति तो बिलकुल बंद हो जाए .कुछ स्वस्थ लोग भी भिक्षावृत्ति को कमाई का आसान तरीका मानते हैं.ऐसे लोगों को भीख देने के बजाय काम करने को कहो तो क्रोधित हो जाते हैं.इस ब्लॉग का मुख्य मक़सद बाल भिक्षवृत्ति और बाल अपहरण को अंतर्सम्बंधित कर देखना और इसे ख़त्म करने की दिशा में अपने स्तर पर कुछ कदम बढ़ाना ही है.

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 5, 2015

यमुना जी सर्वत्र pk की धूम है मैं तो स्वप्न भी pk का ही देख रहा हूॅ । साधु संतों के झुंड के झुंड pk देख रहे हैं । राजनीतिज्ञ तो राजमार्ग पा रहे हैं । कहीं आप भी pk प्रभाव मैं तो नहीं आ गयी हैं । दया ,धर्म , को त्याग कर कैसे इस म्रत्यु लोक से तर पायेंगे । हमारे पाप के अहसास हमैं क्या शांति पाने देंगे । ओम शांति शांति भी क्या शांति दे पायेगी । कुंभ स्नान भी विना दान के नगण्य ही माना गया है । वैचैन मनुष्य ……

    yamunapathak के द्वारा
    January 6, 2015

    हरिश्चंद्र जी ऐसा कुछ नहीं है पी के अभी नहीं देखा मैंने बस बाल भिक्षावृत्ति को रोकना चाहती हूँ ताकि बच्चों का अपहरण ना हो मन द्रवित होता है इसलिए यह ब्लॉग लिखा है.ब्लॉग पर आने का अतिशय धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
January 4, 2015

आदरणीया यमुना जी, सादर अभिवादन! आपने सब कुछ सही लिखा है, मैं सिर्फ अपनी बात रखता हूँ, आपके ही अनुसार कुछ माफिया लोग इस तरह का कारोबार चला रहे हैं, फिर उनसे पंगा कौन लेगा? आम आदमी? फिर आपने यह भी लिखा है की पुलिस वाले भी इनसे मिले रहते हैं…तो बचाएगा कौन? एक बड़े बुजुर्ग ने कहा था-इस देश में खादी(नेता) और खाकी (पुलिस) सभी जुल्मों का जड़ है… अगर ये लोग ठीक हो जाएँ तो सब कुछ अपने आप ठीक हो जायेगा….सादर!

    yamunapathak के द्वारा
    January 4, 2015

    आदरणीय जवाहर जी आपकी बात सत्य है ये दोनों बात मैंने लिखी हैं हम पंगा भी नहीं ले सकते बस अपने स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण काम करें प्रथम ,बाल भिखारियों को पैसे देने से बचें यहां तक कि पेन पेंसिल खिलौने भी ना दें क्योंकि ऐसी कोई भी वस्तु इनके काम नहीं आती इसे बेच कर भी इन्हे पैसे मिल जाते हैं जो गिरोह के काम आ जाते हैं .इनकी भूख मिटाने के लिए इन्हे भोजन ज़रूर दे सकते हैं जो ये हमारे सामने ही खा लें .भिक्षावृत्ति से निजात पाना मुश्किल है पर इसे कम करना इस तरह कुछ आसान होगा जब चिल्लर ही न मिलेंगे तो माफिआ भी क्या करेंगे . दूसरी अहम बात अपने या सगे सम्बन्धियों के बच्चे बच्चियों से सम्बंधित कोई भी updates या जानकारी सोशल साइट्स फेसबुक पर कभी ना डालें.बच्चों को भी समझाएं कि कुछ लाइक्स के चक्कर में यह गलती न करें .कुछ गिरोह इसी के ज़रिये बच्चों को टारगेट करते हैं मैंने यह सावधान इंडिया के एक कार्यक्रम में देखा था फ़लकनामा एक्सप्रेस की घटना के बाद मैं बहुत सशंकित हो गई हूँ मैं हर वह चीज़ अवॉयड करने लगी हूँ जिसमें जान का खतरा है सच कहूँ मुश्किल पड़ने पर कोई पुलिस मंत्री तक मदद नहीं कर पाता अपनी सावधानी ही काम आती है .यह घटना मुझे एक सबक सीखा गई .कितनी भी प्रमाणित सुरक्षित जगह का दावा सरकार करे पर वारदातें होती हैं और कोई कुछ नहीं कर पाता .अब तक मेरे सामान की रिकवरी नहीं हो पाई पुलिस हर बार आती है नए स्टेटमेंट ले जाती है और बस…. आपका अतिशय धन्यवाद.

bhagwandassmendiratta के द्वारा
January 4, 2015

अत्यंत मार्मिक होने के साथ साथ शोधकृत, सुविचारित एवं सूचनाओं से परिपूर्ण लेख है बहुत बहुत साधुवाद | समाज में व्याप्त एक ज्वलंत समस्या को आपने अपने लेख के माध्यम से सक्षम रूप से समाज के समक्ष रखा है| परन्तु समस्या ये भी आती है कि इस परिपेक्ष में सही गलत कि पहचान कर पाना असंभव सा हो जाता है| आज अनेकों NGO , जरूरतमंदों की सहायता करने का दावा करते हैं परन्तु असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हैं और कभी कभी ये भी ख़बरें आती रहती हैं कि इस तरह के गिरोह पुलिस कि शह पर चलाये जाते हैं| आम आदमी विश्वास करे तो किस पर? इसीलिए आमलोग गहराई में गए बगैर अपने करुणा के स्वाभाव की तुष्टि शीघ्रातिशीघ्र कर लेतें हैं लेकिन उन द्वारा दिया गया धन पहुँच जाता है असामाजिक तत्वों के हाथों और समाज को और कमजोर बनाने में लगाया जाता है | मेरे देश और समाज का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है ! भगवान दास मेहंदीरत्ता

    yamunapathak के द्वारा
    January 4, 2015

    भगवन दस जी आप की बात सही है बस कुछ ज़रूरी बातें यह कि …. प्रथम ,बाल भिखारियों को पैसे देने से बचें यहां तक कि पेन पेंसिल खिलौने भी ना दें क्योंकि ऐसी कोई भी वस्तु इनके काम नहीं आती इसे बेच कर भी इन्हे पैसे मिल जाते हैं जो गिरोह के काम आ जाते हैं .इनकी भूख मिटाने के लिए इन्हे भोजन ज़रूर दे सकते हैं जो ये हमारे सामने ही खा लें .भिक्षावृत्ति से निजात पाना मुश्किल है पर इसे कम करना इस तरह कुछ आसान होगा जब चिल्लर ही न मिलेंगे तो माफिआ भी क्या करेंगे . दूसरी अहम बात अपने या सगे सम्बन्धियों के बच्चे बच्चियों से सम्बंधित कोई भी updates या जानकारी सोशल साइट्स फेसबुक पर कभी ना डालें.बच्चों को भी समझाएं कि कुछ लाइक्स के चक्कर में यह गलती न करें .कुछ गिरोह इसी के ज़रिये बच्चों को टारगेट करते हैं मैंने यह सावधान इंडिया के एक कार्यक्रम में देखा था आपका बहुत बहुत धन्यवाद

Shobha के द्वारा
January 3, 2015

प्रिय यमुना जी नव वर्ष की बहुत बहुत शुभ कामना बहुत खुबसुरत लेख परन्तु देर से हाथ लगा डॉ शोभा

    yamunapathak के द्वारा
    January 4, 2015

    शोभा जी नव वर्ष की बहुत सारी शुभकामना

bhagwandassmendiratta के द्वारा
January 3, 2015




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