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वह एक 'अखंड दीप'

Posted On: 16 Oct, 2014 कविता,Junction Forum,Religious में

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वैचारिक यात्रा के प्रकाशवान पथ के प्रत्येक पथिक को दीपोत्सव की बहुत सारी शुभकामना….

प्रत्येक वर्ष यह पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की तरफ जाने की प्रेरणा दे जाता है बचपन में खूब सारे पटाखे निडर होकर जलाती थी …किशोरावस्था में फूलझड़ी जलाने लगी और अब जब भी दीपावली का त्यौहार आता है …घर परिवार समाज के तौर तरीकों ,परम्परा संस्कृति में व्यस्त ….मैं एक रहस्य में खो जाती हूँ ….दीपों की माला तो नहीं पर एक अखंड दीप हर व्यक्ति के पास देख सकती हूँ .उस दीप में विवेक,बुद्धि,संवेदनशीलता का तेल जितना ज्यादा डाला जाए दीप की लौ उतनी ही तेज होती है.और मन मस्तिष्क की शुद्धता उस लौ के दर्शन सूर्य की तेज रोशनी में भी कराती है.यह मेरा अपना अनुभव है ….col3

एक दीप है काफी
तम हरने के लिए
हूँ सोचती….
हज़ारों …लाखों ..अनगिनत दीप भी
क्यों दूर कर पाते नहीं
कालिमा अमावस की
प्रश्न की उज्जवल दामिनी
है मस्तिष्क में कौंध जाती
प्रज्ज्वलित दीप और यह स्याह रात्रि
कौन किस पर हुआ भारी
??

संघर्ष की साक्षी..
बन जाती प्रत्येक संध्या
आँगन की तुलसी समक्ष…
एक दीप है जल उठता
दीवाली तो नहीं ..पर
दीपोत्सव है हर रात मनता
दूर करने को गहन तमस
एक अखंड दीप है जलता

दिवस की आपाधापी
यश की कौंधती रोशनी
सुख वैभव की मरीचिका में
दीप वह अदृश्य रहता .
जैसे-जैसे होती जाती
गहरी और गहरी निशा
आपाधापी ….सुख वैभव के बोध में
छाने लगती स्पष्टता
गलतियों की भयावहता
भाग-दौड़ की असारता
सर्वस्व पाकर भी रिक्तता
यह बोध है भीख मांगता
टुकड़े भर रोशनी की .
याचना गहरी जितनी
झिलमिलाहट दीप के लौ की उतनी
परन्तु अगले दिवस पुनः
मरीचिका यश सुख वैभव की
है परास्त करने लगती
लौ तो है झिलमिलाती
पर बेमानी सी हो जाती

फिर भी है वह अखंड दीप
दिवा की चमक में
चाहे हो जाए बेमानी
उससे एक टुकड़े भर रोशनी की
करता हर मनुष्य याचना
छा जाती जब …
गहन तमस की निस्तब्धता
देख अखंड दीप की उज्जवलता
चिर सत्य बन यह गूँज उठता

मसो मा ज्योतिर्गमय .



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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashokkumardubey के द्वारा
November 10, 2014

सबसे पहले आपको बहुत बहुत बधाई सप्ताह का बेस्ट ब्लागर कहे जाने के लिए .यूँ तो आपका हर आलेख हर कविता बहुत मर्मस्पर्शी और अर्थपूर्ण होता है पर दीपावली के अवसर आपकी यह कविता एक अमर सन्देश देती है .क्षमा करेंगी मुझे बधाई भेजने में बहुत देरी हुयी

yogi sarswat के द्वारा
October 31, 2014

परन्तु अगले दिवस पुनः मरीचिका यश सुख वैभव की है परास्त करने लगती लौ तो है झिलमिलाती पर बेमानी सी है दीपावली के शुभ अवसर पर इस से behatar पोस्ट नहीं हो सकती , बहुत बहुत बधाई यमुना ji !

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
October 29, 2014

बधाई आपको व विलंब के लिये खेद । 

jlsingh के द्वारा
October 29, 2014

विलम्ब के लिए क्षमा याचना के साथ हार्दिक बधाई! आपकी उत्कृष्ट रचनाओं से हम रूबरू होते रहेंगे. सादर

ashishgonda के द्वारा
October 28, 2014

जिस बड़े सम्मान से रचना को नवाजा गया उससे कई गुना आगे तक का सराहनिए प्रयास है, बहुत बहुत बधाई……

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
October 27, 2014

आदरणीया यमुना जी सुन्दर दीपोत्सव की रचना के लिए और ‘बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक’ चुने जाने के लिए बहुत बहुत बधाई ! इस मंच पर आप यूँ ही अपनी उत्कृष्ट रचनाएँ प्रस्तुत करतीं रहें ! सादर आभार और शुभकामनाएँ ! शुक्लाभ्रमर ५

    yamunapathak के द्वारा
    October 27, 2014

    भ्रमर जी आपका अतिशय धन्यवाद

sadguruji के द्वारा
October 27, 2014

आदरणीया यमुना पाठक जी ! अच्छी रचना के लिए और ‘बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक’ चुने जाने के लिए बहुत बहुत बधाई ! इस मंच पर आप यूँ ही अपनी उत्कृष्ट रचनाएँ प्रस्तुत करतीं रहें ! सादर आभार और शुभकामनाएँ !

    yamunapathak के द्वारा
    October 27, 2014

    आदरणीय सद्गुरू जी आप सबों के प्यार,प्रेरणा और शुभकामना ही लेखनी को प्रेरित करती है आपका बहुत बहुत धन्यवाद

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
October 27, 2014

वैचारिक यात्रा के प्रकाशवान पथ के प्रत्येक पथिक को दीपोत्सव की बहुत सारी शुभकामना….यमुना जी तमसो मा ज्योतिर्गमय…बहूत उत्क्रष्ट विचार  माला ..दीपमालाा  सेे भी  उत्क्रष्ट ..किंतु एक दीपक सत्ता सुख नहीं  दे पाया  बल्व जलाया ..तो कुछ पाया ..सी एफ एल ..कुछ ..और पाया …..एल ई डी की टेकनोलोजी चुराई तो सब कुछ पाते सशक्त सत्ता पाई ….अब दीपोत्सव नहीं एेल ई डी उत्सव ही मनाया जायेगा ..जिससे सर्वत्र स्वच्छ भारत गाॅधीमय दीखेगा ..ओम शांति शांति सर्वत्र छा जायेगी 

    yamunapathak के द्वारा
    October 27, 2014

    हरिश्चंद्र जी आपकी रोचक प्रतिक्रिया का बहुत बहुत आभार बिलकुल सत्य है तकनीक का विकास और हम साभार

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
October 20, 2014

 आदरणीय यमुना जी,रोशनीके पावन पर्व पर अच्छी सामयिक कविता ।

    yamunapathak के द्वारा
    October 27, 2014

    बिष्ट जी आपका अतिशय धन्यवाद

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 18, 2014

दीपावली की हार्दिक शुभ मंगल कामनाएं ,आदरणीय यमुना जी ,आप कविता लिखें या आलेख सम सामयिक और विशेष होता है ,हार्दिक बधाई .

    yamunapathak के द्वारा
    October 27, 2014

    निर्मला जी आपका अतिशय आभार आप सबों की प्रतिक्रियाएं मुझे प्रेरित करती रहती हैं .

shakuntlamishra के द्वारा
October 17, 2014

रौशनी पर्व पर अच्छी कविता ,बधाई हो

    yamunapathak के द्वारा
    October 17, 2014

    शकुनतला जी दीपोत्सव की बहुत सारी शुभकामना

ranjanagupta के द्वारा
October 17, 2014

यमुना जी बहुत बहुत दीपावली के ज्योतिर्दीपो की आपको शुभकामनायेँ !और ब्लाग के सभी साथियों को भी दीप पर्व की अशेष बधाई !बहुतसामयिक आलेख की सुन्दर अभिव्यक्ति करके आपने इस पर्व को सार्थकता प्रदान की !सादर सद्भावनाएँ !!

    yamunapathak के द्वारा
    October 17, 2014

    रंजना जी कविता अच्छी लगी यह मेरे मन के बहुत करीब है आप सब को दीपोत्सव की बहुत सारी शुभकामना साभार

sadguruji के द्वारा
October 17, 2014

दिवा की चमक में चाहे हो जाए बेमानी उससे एक टुकड़े भर रोशनी की करता हर मनुष्य याचना छा जाती जब … गहन तमस की निस्तब्धता ! सही कहा है आपने-’एक अखंड दीप हर व्यक्ति के पास देख सकती हूँ .उस दीप में विवेक,बुद्धि,संवेदनशीलता का तेल जितना ज्यादा डाला जाए दीप की लौ उतनी ही तेज होती है.और मन मस्तिष्क की शुद्धता उस लौ के दर्शन सूर्य की तेज रोशनी में भी कराती है !’ वाकई में मन-मस्तिष्क की शुद्धता किसी अखंड दीप से कम नहीं है ! सुन्दर और शिक्षाप्रद रचना ! दिवाली की बहुत बहुत बधाई !

    yamunapathak के द्वारा
    October 17, 2014

    सदगुरू जी आपने प्रतिक्रिया स्वरुप कविता के केंद्रीय भाव को चुना यह मुझे बहुत अच्छा लगा आप सभी को दिवाली की बहुत बहुत शुभकामना

Shobha के द्वारा
October 17, 2014

प्रिय यमुना जी बहुत सुंदर भाव पूर्ण रचना अंत में तमसो माँ ज्योतिर्गमय का कविता में प्रयोग बहुत सुंदर आखर की पंक्तियों में यह भाव चिर सत्य बन यह गूंज उठता मुझे बहुत अनोखा लगा डॉ शोभा

    yamunapathak के द्वारा
    October 17, 2014

    शोभाजी आप को तथा पूरे परिवार को दिवाली की बहुत बहुत बधाई आपका अतिशय धन्यवाद


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