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अब हम महाभारत होने नहीं देंगे....

Posted On: 11 Oct, 2014 Others,Junction Forum में

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एक ही ज़मीन से जुड़े दो भाई …भारत और पाकिस्तान ….सरहद कुरुक्षेत्र बन गया हैं…..
सरहदों की संकीर्णता से उपजी घृणा और उसकी भेंट चढ़े लोगों की इस बेबसी को आनंद बख्शी साहब ने भी अपने शब्दों में बयान किया था….

” इन ज़मीनों ने कितना लहू पी लिया
ये खबर आसमानों तलक है गई
रास्ते पे खड़ी हो गई सरहदें
सरहदों पे खड़ी बेबसी रह गई.

सरहद के समक्ष कई सवाल हैं वह अपने साथ हुए बार बार के धोखे से सिसकती रहे …भाई से आक्रान्त हो शिकायत करे …या कि सीना तान कर गुस्ताखी का ज़वाब गुस्ताख़ हो कर दे ….ज़ाहिर है इस बार तीसरे विकल्प को अपनाया गया है और हो भी क्यों ना …पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की मदद से इस मसले को सुलझाना चाहता है जबकि बेहतर यह होता कि वह किसी भी तीसरी शक्ति को यह बताता ….

अम्नो इन्साफ को गारत नहीं होने देंगे
खूने इंसान की तिज़ारत नहीं होने देंगे
भाई से भाई को हर वक़्त लड़ाने वालों
यहां अब हम महाभारत नहीं होने देंगे

(एक शायर)
हालांकि १० अक्टूबर को नवाज़ शरीफ जी ने भारत से सीमाओं पर गोलीबारी को तुरंत बंद करने को कहा और साथ ही यह भी कहा कि शान्ति की उनकी इच्छा को लेकर कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए.पर इंटरनेशनल बॉर्डर पर नौ दिन तक जिस तरह गोली बारी हुई आज बॉर्डर के पास स्थित २४४ गाँव सुनसान नज़र आ रहे हैं.भारतीय जवानों को बेख़ौफ़ हो एक के बदले तीन मारने का स्पष्ट आदेश मिल चुका था भारत का नुकसान भी हुआ है पर वही बात कि आखिर शान्ति सुलह समझौते का राग कब तक चले .शक्ति और क्षमा शीर्षक कविता की कुछ पंक्तियाँ याद आती हैं
क्षमा ,दया,टप,त्याग मनोबल
सब का लिया सहारा पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे कहो कहाँ कब हारा
क्षमाशील हो रिपु समक्ष तुम विनत हुए जितना ही
दुष्ट कौरवों ने तुमको कायर समझा उतना ही .
अच्छा हुआ भारत ने अपने रवैये में तब्दीली लाई .हाँ ,खाली हुए गाँव पर भी ध्यान रखना ज़रूरी है ताकि कोई घुसपैठ अंजाम ना ले सके.हर बार की ऐसी लड़ाई में देश को अच्छा खासा नुकसान होता है.

आज जब पूरे विश्व के समक्ष भारत पाकिस्तान शान्ति के नोबेल पुरस्कार के सम्मान से नवाज़े जाने के लिए चुन लिए गए हैं तो क्या उपर्युक्त चार पंक्तियाँ प्रत्येक पाकिस्तानी और हिन्दुस्तानी का मूल मंत्र नहीं बन जाना चाहिए ??जब एक विज्ञापन देखती हूँ “भाई को गिराने की आदत थी मुझे बनाने की आज मैं किसी चीज़ से नहीं डरता ” तो मुझे ये भारत पाक दो भाईयों की दास्ताँ ही लगती है.यूं तो भारत ने हमेशा ही शान्ति,सुलह और धैर्य का परिचय देकर एक अदद भाई की भूमिका निभाई है पर पाकिस्तान उस बच्चे की तरह व्यवहार कर रहा है जो कंचे के खेल में क्रोध और क्षोभ में अपने सारे कंचे गँवा बैठता है.शिक्षा ,स्वास्थ्य ,विज्ञान के क्षेत्र में करने की बजाये रक्षा सामग्रियों पर खर्च कर वह स्वयं को कितना खोखला कर रहा है इसका उसे भान नहीं है.

तेरी बदहालियाँ ऐ पाके ज़मीं करती कई सवाल तुझसे
ओ बेखबर हुकमरान इस पाके ज़मीं को दोजख ना कर
मुनासिब है ज़रूरी है वतन हक़दार है जिन खुशियों का
ओ मुल्क के हुक्मरानों अवाम को उनसे महरूम ना कर .


उसकी सबसे बड़ी बेचैनी भारत में एक सुदृढ़ सरकार बन जाने से उपजी उसकी हताशा है.हाल के कुछ दिनों में भारत ने जिस गति से वैश्विक ,और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़नी शुरू की है पाकिस्तान उससे खीझ गया है.ऐसे माहौल में दलगत राजनीति से ऊपर हो कर सभी नेताओं को एकजुट होकर पाक की नीतियों की आलोचना करनी चाहिए ना कि मोदी जी के विभिन्न भाषणों की तहरीर याद करना अपना कर्त्तव्य समझना चाहिए .कभी कोई उन्हें छप्पन इंच के सीने की बात याद दिलाता है तो कभी दुश्मन को मुंह की खिलाएंगे ….क्या विपक्ष सिर्फ और सिर्फ आक्षेप के लिए इंतज़ार कर रहा होता है ?? वे जवान जो अपने घर परिवार को छोड़ कर सरहद पर जान की बाजी लगा रहे होते हैं वे किसी दल विशेष के नहीं बल्कि भारत माँ के सपूत होते हैं ….उनके हौसले को बुलंद रखने के लिए शब्दों की सकारात्मकता बेहद ज़रूरी है और हम हमेशा निराशा भरी बात करे ही क्यों ?? भारत एक तरफ विकास के रास्ते पर अग्रसर शिक्षा ,स्वास्थय, खेल ,विज्ञान ,अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में नित्य आगे बढ़ता जा रहा है पाकिस्तान अपने इस भाई के प्रगति पथ से खुश और उसका अनुकरण करने की बजाये कौरवों की तरह अपने ही कुल का नाश करने पर आमादा है .युद्ध से ना उस युग में भलाई हुई थी ना अब होगी ..महाभारत में भी श्रीकृष्ण ने युद्ध को टालने की भरसक कोशिश की थी.समस्याएं तलवार से नहीं कलम से सुलझती हैं जिसका सबूत है भारत पाक संयुक्त नोबेल शान्ति पुरस्कार .संयुक्त राष्ट्र संघ में उसके द्वारा कश्मीर के मसले को उठाना ही यह साबित करता है कि पूरे विश्व पटल पर वह भारत को गुनाहगार ठहराना चाहता है.कश्मीर में बाढ़ से आई तबाही पर वहां के बाशिंदों की सहायता के लिए जिस तरह से भारतीय जवानों ने तत्परता दिखाई वह इस बात का बड़ा सबूत है कि भारतीय तलवार बन्दूक गोली बारूद नहीं प्यार और सेवा की भाषा से इत्तिफ़ाक़ रखता है.
हालांकि फैज़ साहब की इस चिंता से भी मैं पूर्ण इत्तिफ़ाक़ रखती हूँ कि…

हम तो ठहरे अज़नबी कितनी मुलाकातों के बाद
खून के धब्बे धुलेंगे कितनी बरसातों के बाद

कश्मीर विभाजन के समय से ही भारत का हिस्सा माना जाता रहा है…फिर भी पाक अधिकृत कश्मीर का सारा भू भाग अभी तक पाक के कब्जे में है आज ज़रुरत है कश्मीर के बाशिंदे ,रहनुमा और भारत के शेष हिस्सों में रहने वाले मुस्लिम भाई बहन भारत का साथ दें अपनी ज़मीन ही अपना ज़न्नत है.ऐसा सोच एकजुट रहे .

हर आँख का तारा है तारा ही रहेगा
ज़न्नत का नज़ारा है नज़ारा ही रहेगा
दहशत से कभी हम ना दबे हैं ना दबेंगे
कश्मीर हमारा है हमारा ही रहेगा


(एक शायर)
कश्मीर के मुद्दे को पाकिस्तानी हुकमरान चुनावी मुद्दा बना देते हैं और फिर ज़ंग की इबारत उस मुद्दे का सबब बन जाता है.आज जब मलाला ने बालिका शिक्षा के पक्ष में आवाज़ बुलंद Copy of Copy of value pageकर शान्ति के नोबल पुरस्कार से पाक की ज़मीं को पूरे विश्व में गौरवान्वित किया है …तब इस साहसी बिटिया के पैगाम को पाकिस्तान को समझना चाहिए.कितना सुखद होता वह इस बार बार के ज़ंग के रक्त बहाना छोड़ इसे कभी ना ख़त्म होने वाली दोस्ती ,अपनत्व और अहदे वफ़ा की शक्ल में तब्दील कर देता .१७ वर्षीया पाकिस्तान की साहसी मलाला युसूफजाई और ६० वर्षीय हिन्दुस्तानी सिपाही कैलाश सत्यार्थी को संयुक्त रूप से शान्ति नोबल पुरस्कार से नवाज़ा जाना ना सिर्फ भारत पाक दो वतनों के लिए बल्कि शान्ति की स्थापना की दिशा में पहल का स्वागत करने वाले कई और मुल्कों के लिए भी एक बहुत ही सार्थक और सकारात्मक सन्देश बन सकता है.महज़ सत्रह वर्ष और सोच बेहद परिपक्व तभी तो मलाला ने दोनों वतनों के बीच शांति की दिशा में एक खासा पहल की और गुज़ारिश की कि जिस दिन कलम के दो सिपाही शान्ति का नोबेल प्राइज ले रहे हों तो दोनों वतन के हुक्मरान श्रीमान नरेंद्र मोदी जी और श्रीमान नवाज़ शरीफजी साथ साथ वहां ज़रूर मौजूद रहे.

काश यह प्रतीकात्मक एकता एक नए मधुर रिश्ते की ऐसी बीज बो जाए कि वह स्वस्थ मज़बूत वृक्ष बन ना सिर्फ दो मुल्कों को बल्कि पूरी दुनिया को अपनी शीतल छाँव से उपकृत करता रहे.


नींव बन जाए भरोसे की ….छत हो मोहब्बत की…और आपसी सौहाद्र की दीवारें

काश सिसकती सरहद पर खिल जाएं ढेर सारे खूशबू बिखेरते गुलों से तबस्सुम .



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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
October 18, 2014

तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ अपने पहले संवाद में प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्ण युद्ध शायद ही होंगे, लेकिन प्रतिरोध तथा दूसरों का बर्ताव प्रभावित करने के हथियार के तौर पर बल अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। संघर्षों की अवधि छोटी होगी। खतरे ज्ञात हो सकते हैं, लेकिन शत्रु अदृश्य हो सकता है। प्रधानमंत्री का यह बयान हाल में पाकिस्तान की ओर से एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्षविराम उल्लंघन और लद्दाख में चीनी घुसपैठ की पृष्ठभूमि में अहम है। बस और कुछ नहीं कहना है मुझे…

rppandey के द्वारा
October 17, 2014

यमुना जी भारत में जहा , देवासुर संग्राम से लेकर महाभारत जैसे युद्ध हुए वहा गांधी जी जैसा बात करना अजीब लगता है / रावण, ,दुर्योधन और दैत्य कैसे माने आप जरूर जानती होगी / गांधी जी वैसे भी देश का बहुत नुकसान कर चुके है , कम से कम अब तो गांधी की भाषा बोलना बंद कीजिये /

amitmit1983 के द्वारा
October 13, 2014

पहले छेड़ा कारगिल युद्ध, फिर किया अपहरण विमान का…. देख रहा दिल आज पड़ोसी, मेरे हिँदुस्तान का….

    yamunapathak के द्वारा
    October 14, 2014

    अमित जी अब तो संयुक्त राष्ट्र भी पाकिस्तान की बात पर ध्यान नहीं दे रहा है …पिछले कई दशकों से बार बार कश्मीर के राग को सुन कर उसने भी कान बंद कर लिए हैं …बेहतर हो कि पाकिस्तान कश्मीर की ज़मीन पर अपने दावे को छोड़ कर अपने वतन के बाकी मुद्दों पर ध्यान दे …आज सच कहा आपने पाकिस्तान भारत की सुदृढ़ सरकार के सब्र की परीक्षा ले रहा है …मोदी जी की उदघोषणाओं को ललकार रहा है….सवाल यह है कि यह दो व्यक्तियों के बीच की चुनौती नहीं पूरे मुल्क से जुड़ा मुद्दा है …ऐसे में जब हमारे जवान डटे हुए हैं ….हमें उनका उत्साह बढ़ाना चाहिए. ब्लॉग पर आने का बहुत बहुत धन्यवाद

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
October 13, 2014

काश यमुना भारत से होती पाकिस्तान मैं भी बहने लगती तब महाभारत नहीं होता महा भारत  बन जाता और ओम शांति शांति हो जाती

    yamunapathak के द्वारा
    October 14, 2014

    हरिश्चंद जी मैं जानती हूँ इस ब्लॉग को सरसरी तौर से पढने पर इसके केंद्रीय भाव को समझ पाना मुश्किल होगा ….पाकिस्तान की बार बार के इस रवैये को विश्व मंच भी पहचान चूका है …कश्मीर मुद्दे के विषय में उसके द्वारा संयुक्त राष्ट्र को भेजे गए पत्र का कोई ज़वाब नहीं दिया गया बल्कि आपसी बातचीत से समस्या सुलझाने की बात कही गई…कश्मीर के रास्ते जिस तरह से आई एस आई एस की भी एक झलक आज देखी गई ..(हालांकि इससे पैनिक होने की ज़रुरत नहीं)इस सारे गतिविधि को देखते हुए साहस और कूटनीति की ज़रुरत है दुस्साहस और लफ़्फ़ाज़ी की नहीं …. पाकिस्तान के अंदरूनी हालात ठीक नहीं राजनीति लड़खड़ा रही है और ऐसे ही हालात वह भारत देश में भी देखने को बेचैन है वह युद्ध चाहता है और इसी बहाने भारत की प्रगति के पहिये रोकना भी चाहता है ….क्या यह उचित होगा की हमारे नेता गण पूरे अवाम को युद्ध की आग में झोंक दें ….गोलीबारी का ज़वाब पूरी मुस्तैदी से भारतीय फ़ौज़ दे रही है जिसकी कल्पना भी पाक नहीं कर सकता था ….पर अभी अवाम को अपने आस पास के हालत से सचेत रहना है कोई अवांछित तत्त्व हमारे बीच हों और हम पूरे बेखबर बने रहे ….हम बॉर्डर पर लड़ने नहीं जा सकते पर सचेत तो रह सकते हैं . ब्लॉग पर आने का बहुत बहुत आभार

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
October 12, 2014

आदरणीय यमुना पाठक जी, काश ऐसा होता जैसा आपने लिखा है । लेकिन पाक एक शैतान बच्चे की तरह है वह मानेगा नही । जब थप्पड लगता है तब दो चार दिन ठीक रहता है फिर वैसा ही करने लगता है । बहरहाल शांति की दुआ करें यह सभी के हित मे है । अच्छे लेख के लिये बधाई ।

    yamunapathak के द्वारा
    October 13, 2014

    बिष्ट जी आपकी बात से सहमत हूँ ..पाक इन गोलाबारी के फेर में अपनी अवाम को भूख गरीबी अशिक्षा के हालात में बिलबिलाने को मज़बूर कर दे रहा है.दरअसल वहां के राजनितिक हालात डांवाडोल हैं जबकि भारत में एक सुदृढ़ सरकार बन चुकी है प्रगति की राह पर जब कोई भी आगे बढ़ता है तो समझदार उस प्रगति से प्रेरणा लेते हैं और बेवकूफ प्रगट को दिग्भ्रमित करने की चेष्टा .वर्त्तमान सरकार को अगर देश के सभी नेताओं और जन जनकी वास्तविक एकता सहयोग मिल जाए तो पाकिस्तान आज शांत हो जाए. ब्लॉग पर आने का आपका अतिशय आभार

sadguruji के द्वारा
October 12, 2014

आदरणीया यमुना पाठक जी ! आदर्शवादी दृष्टि से बहुत अच्छा लेख,परन्तु व्यवहारिक से मुझे नहीं लगता है कि पाकिस्तान कभी सुधरने वाला है ! उनकी घृणा हिंदुस्तान और हिन्दुओं से है,जो मजहबी कट्टरता के कारण कभी जाने वाली नहीं है ! इसीलिए ज्यादा अच्छा है कि उसके द्वारा फायरिंग और घुसपैठ करने पर उसे करारा जबाब दिया जाये ! इसके अलावा उसे सुधारने का हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है ! इस सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता है ! थोथा आदर्शवाद हमें बर्बाद कर देगा !

    yamunapathak के द्वारा
    October 13, 2014

    aadarneey sadaguroo jee aadarsh hee vyavahar ban sake isee uddeshya se yah blog likha hai maine.paakistan yah samajh hee naheen pa rahaa ki vah apanee zameen ke naam ke arth ko kis kadar tabah kar raha hai janata bhookh se bilbila rahee hai mutthee bhar logon kee soch ne yah haal kiya hai vah chahata hai ki bharat kee vartamaan sthir sarkaar yuddha kaa faisala le taaki usake vikaas par badhate kadam divert ho jaaein aur hamare desh ke rahnumaaon kee bhee zid ki modee jee munh tod zavaab kyon naheen dete kootneeti yahee sahee hogee ki aavesh mein naa aaya jaaye yuddha ka khyal abhee bilkul uchit naheen hai …. yah thotha aadarsh vaad kam se kam ab is haalat mein to bilkul naheen jab malala jaisee kishoree ne taalibaan kee bandook ka zavaab shabda kalam aur kaagaz se de diya hai …..sahee vaqt par hee sahee faisale lene chahiye ….main iishvar se duaa karoongee ki sarhad par tanav ,goleebaree khatm ho jaaye aur tab tak vartamaan sarkaar bhee bhavavesh yaa aavesh mein naa aaye….yuddha se samasya ka samadhan naheen milega ….abhee desh prakritik aapada kee mar jhel raha hai behatar hai maanav janit aapada ko aamantrit na kiya jaaye…..yahee sahee neeti hogee . blog par aane ka atishay aabhar

Shobha के द्वारा
October 11, 2014

प्रिय यमुना जी आपकी आखिरी पंक्तियाँ ‘ नीव बन जाए ……….तबस्सुम यह पंक्तियाँ बीएस दिवास्वप्न है ऐसा कभी नही होगा मै दस वर्ष तक पाकिस्तान के लोगों मैं रही हु जिनमे पठान पंजाबी सिंधी मुहाजर (भारतीय मुस्लिम जो) हमने सबसे कहा आप हमारे दिल्ली आना परन्तु एक ने भी हमें नहीं बुलाया जबकि हमारे मधुर संबंध थे वह आपको बुला लेंगे परन्तु उनका पड़ोसी आपको काफ़िर कह कर सम्बोधित करंगे बच्चों के दिलों में जहर भर दिया है अब तो जेहाद का शोक चढ़ गया है और क्या लिखू इतना जहर भर दिया गया है हम तो बड़े भाई है वह दुश्मन शोभा

    yamunapathak के द्वारा
    October 13, 2014

    शोभा जी तबस्सुम की कुछ झलक तो तो मलाला और कैलाश जी को नोबेल से सम्मानित होने पर महसूस की जा रही है.आपके अनुभव सही हैं पर फिर भी मैं कहूँगी की इस हालत में जब हमारा देश प्राकृतिक आपदा झेल रहा है फिर भी कई विकास वादी योजना पर आगे बढ़ रहा है …देश को युद्ध की आग में झोंक देना बिलकुल तर्कसंगत नहीं लगता.पाकिस्तान ने फिर फायरिंग जारी कर दी है …वह चाहता है कि विश्व के विशाल नभ में उभरते भारत देश के सूर्य को गोलीबारी,आतंकवाद कश्मीर आलाप से दिग्भ्रमित कर दो और यही हमारे नेताओं और अवाम को समझना है …..क्या युद्ध में भी लोग मारे नहीं जाएंगे ?? और क्या फिर सदा के लिए वह यद्ध से मुंह मोड़ लेगा …नहीं …पाकिस्तान वह पड़ोसी /भाई है जो इस कहावत को चरितार्थ करता है “ना भाई जस भाई ना भाई जस दुश्मन ” उसकी छटपटाहट बस इसलिए है क्योंकि भारत तेजी से प्रगति पथ पर दौड़ रहा है…..और जाणारा जागृत है ……वह बस यही कर भारत के सुख चैन को छीन सकता है …ज़रुरत है ….हमारे एकजुट रहने की …..सेना के जवान डेट मुक़ाबला कर रहे हैं हम क्यों उन्हें हतोत्साहित करें ……सवा सवा लाख पर एक को लडाऊँगा भी इस भारत की धरती से गूंजा था …..अभी युद्ध बिलकुल भी तर्कसंगत नहीं आपका अतिशय आभार


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